वाराणसी में खतरे के निशान से नीचे उतरी गंगा

बाढ़ क्षेत्र में गाद, मलबे और कीचड़ की समस्या


वाराणसी

गंगा की रौद्र लहरें शांत होकर खतरे के निशान से तेजी से नीचे उतरने लगी है। जलस्तर में लगातार घटाव से तटवर्ती क्षेत्र के लोग भी राहत की सांस ले रहे हैं। रविवार अपराह्न दो बजे तक गंगा का जलस्तर 70.52 मीटर दर्ज किया गया।

केन्द्रीय जल आयोग के अनुसार जलस्तर अब 5 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घट रहा है। गंगा में घटाव से वरूणा और असि नदी का भी जलस्तर बाढ़ क्षेत्र से खिसकने लगा है। जिन क्षेत्रों में बाढ़ का पानी कम हुआ है वहां अब कीचड़ और बाढ़ में बहकर आये गाद, मलबा, कूड़ा कचरा लोगों के लिए मुसीबत बने गये हैं। इन क्षेत्रों में संक्रामक रोगों के साथ डेंगू के खतरे की भी आशंका गहराने लगी है। बाढ़ के चलते रमना, टिकरी, तारापुर, डंगरी व मुड़ाडीह के अलावा चौबेपुर के ढाब क्षेत्र के कई गांवों में सब्जी की खेती बरबाद हो गई है। पीड़ित किसानों की लागत और परिश्रम भी बाढ़ के पानी में बह गया। 

अब इन किसानों के सामने आर्थिक संकट के साथ खाने पीने की समस्या भी है। शहर में गंगा किनारे लंका,अस्सी, सामने घाट, मारुति नगर के अलावा वरुणा नदी के तटवर्ती इलाके शैलपुत्री, तीनपुलवा, पुल कोहना,जैतपुरा, नदेसर ,शास्त्री घाट के आसपास के तमाम इलाके पानी में अभी भी डूबे हुए हैं। यहां जिला प्रशासन और एनडीआरएफ के जवान गश्त कर राहत सामग्री बांट रहे है। बाढ़ पीड़ितों की मदद में अब स्वयंसेवी संस्थाएं भी जरूरत के सामान व खाद्य सामग्री लेकर पीड़ितों की मदद में लगे हुए हैं।


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