मुंबई मनपा में लाएंगे कांग्रेस की सत्ता

भ्रष्टाचार के दलदल से निकालना लक्ष्य    सदन से सड़क तक खोलेंगे लूट की पोल


मुंबई मनपा में कांग्रेसी महापौर बनाने के लिए कटिबद्ध, विपक्ष के नेता रवि राजा की गिनती स्वच्छ छवि वाले जुझारु नेताओं में होती है। विपक्ष के नेता के रूप में पिछले साढ़े चार सालों से मनपा सदन में जन समस्याओं एवं भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाने वाले रवि राजा का कहना है कि मुंबई मनपा भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी हुई है। घोटाले की दलदल में डूबी मनपा को इससे बाहर निकालने का उद्देश्य लेकर आगामी मनपा चुनाव में जनता के बीच जाने वाली मुंबई कांग्रेस ने सदन से सड़क तक मनपा में जारी मनमानी की पोल खोलने का फैसला किया है। रवि राजा कहते हैं कि सत्तारूढ़ दल के पदाधिकारी एवं प्रशासनिक अधिकारी जनता के पैसों को अपनी तिजोरियों में भर रहे हैं। मुंबई की जनता सत्तारुढ़ दल से आजिज आ गयी है, जिसकी वजह से इस बार मुंबई मनपा में कांग्रेस सत्ता स्थापित करेगी। मनपा के कामकाज एवं आगामी मनपा चुनाव को लेकर हमारे वरिष्ठ संवाददाता दिनेश सिंह ने मनपा में नेता विरोधी दल रवि राजा से लंबी बातचीत की प्रस्तुत है प्रमुख अंश।  

कोरोना काल में मनपा द्वारा जनता को दी गई सुविधा से आप कितना संतुष्ट हैं?

मुंबई मनपा देश की सबसे बड़ी और धनी महानगर पालिका है। मुंबई मनपा जो कि खुद का पांच मेडिकल कॉलेज भी चलाती है। कोरोना काल में मनपा का काम काज अच्छा रहा। मनपा आयुक्त इकबाल सिंह चहल के कार्य पद्धति का मुंबई की जनता को बड़ा फायदा हुआ। मनपा में निचले स्तर पर काम करने वाले सहायक आयुक्त का काम काज इतना अच्छा रहा कि मनपा आयुक्त की गाइड का उन्होंने हकीकत में बदला जिसका फायदा मुंबई की जनता को खूब मिला।लेकिन मनपा के कुछ अधिकारी इस माहमारी में भी अपना हित साधने में पीछे नहीं हटे।

इस तरह के कौन अधिकारी है, जिन्हें आप जिम्मेदार मानते है?

मनपा के कुछ उच्च पदस्थ अधिकारी रहे, जिनके कामों से मनपा की छवि मलिन हुई। अधिकारी लोगों को सुविधा देने में भी अपना हित साधते रहे, जिससे मनपा पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा। मनपा में क्वारंटाइन सेंटर में रहे लोगों को खाना देने के नाम पर बड़ा गड़बड़ घोटाला किया गया। कोरोना काल में लोगों की खिचड़ी उपलब्ध कराई जिस पर मनपा ने लगभग 100 करोड़ रुपए खर्च किया। इसमें भी बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ। मनपा आयुक्त का ऐसे अधिकारियों पर कोई अंकुश नहीं रहा, जिससे मनपा की किरकिरी हुई।

कोरोना काल में मनपा प्रशासन के काम को किस रूप में देखते हैं?

देखिए ! मुंबई की गिनती देश की ही नहीं, बल्कि एशिया के सबसे संपन्न महानगर पालिकाओं में होती है। मुंबई में रहने वाले सभी लोगों के स्वास्थ्य को उत्तम रखने एवं सुविधा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी मुंबई मनपा की है। मैं शिकायत नहीं, बल्कि हकीकत कह रहा हूं। जब वैश्विक महामारी कोरोना की वजह से पूरी दुनिया में हाहाकार मचा हुआ था, मुंबई सहित पूरे देश में शुरु लॉकडाउन की वजह से उद्योग धंधे ठप थे। रोजी रोटी का संकट था, हर आदमी कोरोना के संकट से उबरने का प्रयास कर रहा था। 

मुंबई में पहली बारिश में पानी भर गया, किसे जिम्मेदार मानते हैं ?

शहर एवं उपनगरों में पानी भरने के लिए निश्चित रुप से मनपा प्रशासन जिम्मेदार है। नाला सफाई के नाम पर हर साल करोड़ों रुपए की निधि खर्च की जाती है। नालों को चौड़ा करने का काम चलता रहता है। ब्रिमस्टोवाड परियोजना के तहत पिछले पंद्रह सालों में पानी की तरह पैसा बहाया गया है। लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। अब तो नए इलाकों में भी पानी भर रहा है। किसी तरह का अंकुश नहीं होने की वजह से अधिकारियों एवं ठेकेदारों की मिली भगत से कागजों पर ही नाला सफाई हो जाती है। प्रशासन ने नाला सफाई का दावा किया। हमने मनपा क्षेत्र के सभी नालों का सर्वे कराया। 

मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष भाई जगताप, कार्याध्यक्ष चरण सिंह सप्रा सहित अन्य नेताओं ने नाला सफाई के काम का जायजा लिया। सबूत के साथ मनपा आयुक्त को पत्र लिखा, लेकिन किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई है। कर दाताओं का करोड़ों रुपए ठेकेदारों की जेब में जा रहा है।

कोरोना संकट के दौरान मनपा के काम काज पर किस तरह का प्रभाव पड़ा है?

देखिए! कोरोना ने केवल मनपा के कामकाज को ही नहीं, बल्कि हमारे जीवनशैली को प्रभावित किया है। पिछले डेढ़ वर्षों में बहुत कुछ सीखने को मिला है, लेकिन मुंबई मनपा में कोरोना के नाम पर लूट मची है। अधिकारी एवं कर्मचारी भ्रष्टाचार के इस अवसर को कत्तई नहीं छोड़ना चाह रहे हैं। कई महीनों तक माह से स्थायी समिति की बैठक ही नहीं हुई, जबकि नियम यह है कि स्थायी समिति की मंजूरी के बाद ही किसी तरह का खर्च किया जा सकता है। हमने स्थायी समिति की नियमित बैठक बुलाने की मांग की। अभी भी वर्चुअल बैठक हो रही है। वर्चुअल बैठक में भी मनपा आयुक्त हिस्सा नहीं लेते हैं। सत्तारूढ़ दल एवं प्रशासनकी तरफ से मनमानी निर्णय लिया जा रहा है।

कोविड सेंटर में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। इस पर क्या कहना है ?

देखिये आरोप की बात नहीं है। काफी हद तक यह सच है, कोविड सेंटर एवं अस्थायी अस्पतालों के निर्माण एवं साधन सामग्री उपलब्ध कराने के नाम पर जमकर लूट खसोट हुई है। स्थायी समिति एवं मनपा की सभा में इस मुद्दे को हमने जोरदार ढंग से उठाया था। इस मुद्दे को लेकर हम जनता के बीच भी जाएंगे।

भाजपा का आरोप है कि शिवसेना के भ्रष्टाचार में कांग्रेस भी शामिल है, इसलिए तीसरे नंबर की पार्टी को विपक्ष के नेता की कुर्सी दी गई ?

सब बकवास है। भाजपा की बुनियाद झूठ पर टिकी हुई है। सरकार एवं मनपा में भाजपा एवं शिवसेना की युति थी। सदन में हमने बार बार कहा था कि तत्कालीन मनपा में भाजपा के गुट नेता मनोज कोटक विपक्ष के नेता पद की जिम्मेदारी संभाले, लेकिन भाजपा को सत्ता की मलाई खानी थी। हमने विपक्ष की जिम्मेदारी को निभाया। कानून के तहत हम जिम्मेदारी निभा रहे हैं। पहले उच्च न्यायालय फिर सर्वोच्च न्यायालय ने भाजपा की मांग को खारिज किया है। कांग्रेस पार्टी सदन एवं सदन के बाहर विपक्ष की भूमिका पूरी ईमानदारी से निभा रही है।

मनपा चुनाव में कांग्रेस का क्या रुख रहेगा ?

कामन मिनिमम प्रोग्राम के तहत कांग्रेस पार्टी महाविकास आघाड़ी सरकार का हिस्सा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले एवं मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष भाई जगताप ने चुनाव को लेकर पहले ही स्थिति स्पष्ट कर दी है। कांग्रेस पार्टी खुद के बल पर चुनाव मैदान में उतरेगी। पूरा विश्वास है कि मुंबई की जनता के बल पर इस बार मुंबई में कांग्रेस का महापौर बनेगा।


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