विश्रामासन के फायदे


इस आसन को करने से व्यक्ति स्वयं को पूर्ण विश्राम की स्थिति में अनुभव करता है इसीलिए इसे विश्रामासन कहते हैं। इसका दूसरा नाम बालासन भी है। यह तीन प्रकार से किया जाता है। पेट के बल लेटकर, पीठ के बल लेटकर और वज्रासन में बैठकर। यहां प्रस्तुत है पेट के बल लेटकर किया जाने वाला विश्रामासन। यह कुछ-कुछ मकरासन जैसा है।

विधि : पेट के बल लेटकर बाएं हाथ को सिर के नीचे भूमि पर रखें तथा गर्दन को दाई ओर घुमाते हुए सिर को हाथों पर रखें, बाएं हाथ सिर के नीचे होगा तथा बाएं हाथ की हथेली दाएं हाथ के नीचे रहेगी। दाएं पैर को घुटने मोड़कर जैसे बालक लेटता है, वैसे लेटकर विश्राम करें। इसी प्रकार दूसरी ओर से किया जाता है।

सावधानी : आंखें बंद रखना चाहिए। हाथों को सिर के नीचे सुविधानुसार ही रखें और शरीर को ढीला छोड़ देना चाहिए। श्वास की स्थिति में शरीर को हिलाना नहीं चाहिए। श्वास गहरी और आरामपूर्ण तरीके से लेना चाहिए।

फायदे:

श्वास की स्थिति में हमारा मन शरीर से जुड़ा हुआ रहता है, जिससे की शरीर में किसी प्रकार के बाहरी विचार उत्पन्न नहीं होते। इस कारण से हमारा मन पूर्णत: आरामदायक स्थिति में होता हैं, तब शरीर स्वत: ही शांति का अनुभव करता है।

आंतरिक अंग सभी तनाव से मुक्त हो जाते हैं, जिससे कि रक्त संचार सुचारु रूप से प्रवाहित होने लगता है। और जब रक्त सुचारु रूप से चलता है तो शारीरिक और मानसिक तनाव घटता है।

जिन लोगों को उच्च रक्तचाप और अनिद्रा की शिकायत है, ऐसे मरीजों को बालासन से लाभ मिलता है।

पाचंनतंत्र सही रखता है तथा भोजन को सरलता से पचाने में सहायता करता है।


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