तालिबान के खिलाफ बगावत

जलालाबाद में भीड़ पर फायरिंग, तीन की मौत । अफगानी सेना के चार कमांडरों की हत्या


काबुल

अफगानिस्तान में तालिबानी कब्जे को अभी महज 4 दिन ही हुए हैं और इस हुकूमत के खिलाफ बगावत शुरू हो गई है। तालिबान विरोधी फौजें पंजशीर में इकट्ठा हो रही हैं। इनमें अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह, अफगानिस्तान के वॉर लॉर्ड कहे जाने वाले जनरल अब्दुल रशीद दोस्तम, अता मोहम्मद नूर के सैनिक और अहमद मसूद की फौजें शामिल हैं। चारिकार इलाके में कब्जे के अलावा इन विद्रोही फौजों ने पंजशीर में नॉर्दन अलायंस, या यूनाइटेड इस्लामिक फ्रंट का झंडा भी फहरा दिया है। पंजशीर घाटी में 2001 के बाद पहली बार अलायंस का झंडा फहराया गया है। इस दौरान लोगों की तालिबानियों से झड़प हो गई और लोगों को डराने के लिए तालिबानियों ने फायरिंग कर दी, जिसमें 3 लोगों के मारे जाने की खबर है। इस बीच, तालिबानियों ने अफगानी सेना के 4 कमांडरों को कंधार के एक स्टेडियम में भीड़ के सामने मौत के घाट उतार दिया। इधर, तालिबान समर्थकों ने कंधार में ही शाह वली कोट के पुलिस प्रमुख पाचा खान को भी मार दिया है। तालिबान समर्थकों का कहना था कि पाचा खान एक खूंखार कमांडर था जो तालिबान लड़ाकों के नाखून निकाल लेता था। ऐसी खबरें हैं कि तालिबान से बचने के लिए जो अफगानी सैनिक छिप गए थे वे अब पंजशीर पहुंचे रहे हैं। ये सैनिक दिवंगत अफगानी पॉलिटिशियन अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद की अपील पर पंजशीर में इकट्ठे हो रहे हैं।

पाक ने खूंखार आतंकी छोड़ा

इस बीच, पाकिस्तान का तालिबान प्रेम धीरे-धीरे दुनिया के सामने आने लगा है। तालिबान के सक्रिय सदस्य मुल्ला मोहम्मद रसूल को पाकिस्तान सरकार ने 5 साल जेल में रखने के बाद रिहा कर दिया है। 

जलालाबाद में लोग अफगानिस्तान का झंडा लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। वे मांग कर रहे हैं कि अफगानिस्तान के मौजूदा झंडे को ही राष्ट्रीय ध्वज बनाए रखा जाए। इससे पहले मंगलवार को पाकिस्तान की सीमा से लगे खोस्त प्रांत में भी लोगों ने अफगानी झंडा लेकर प्रदर्शन किया था।

हामिद करजई से मिले तालिबानी नेता

अफगानिस्तान में तालिबान सरकार बनाने की कोशिश में जुटा है। इसी सिलसिले में तालिबानी नेताओं ने बुधवार को अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई से मुलाकात की है।

तालिबान की तबाही की तस्वीरें सामने आने लगीं

तालिबान ने बामियान में हजारा समुदाय के नेता अब्दुल अली मजारी के स्टेच्यू को उड़ा दिया है। ये जानकारी ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट सलीम जावेद ने शेयर की है।


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