तालिबान के खिलाफ किलेबंदी

अफगानिस्तान में जंग अभी खत्म नहीं!


काबुल

अफगानिस्तान पर हथियारों के जोर पर कब्जा जमाने के बाद तालिबान ने अपना खूनी खेल शुरू किया है। महिलाओं से जबर्दस्ती करने के अलावा देश छोड़कर बाहर निकलने की कोशिश करने वालों की हत्या के साथ तालिबान का गन-तंत्र शुरू हो गया है। इस बीच कुछ क्षेत्रों से तालिबान के खिलाफ उठी बगावत की चिंगारी ज्वाला बनती दिख रही है। देश की राष्ट्रप्रेमी अवाम तालिबान के खिलाफ मुखर हो चुकी है। पहले उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने जंग जारी रहने का ऐलान किया। इसके बाद पंजशीर घाटी से अहमद मसूद ने भी ललकार लगाई है। जिससे साफ है कि तालिबान के खिलाफ किलेबंदी हो रहा है और अफगानिस्तान की जंग अभी खत्म नहीं हुई है।

'घुटने नहीं टेके जाएंगे'

मसूद ने साफ-साफ ऐलान किया है कि तालिबान को चुनौती दी जाएगी और घुटने नहीं टेके जाएंगे। उन्होंने अपने पिता अहमद शाह मसूद के पैर पर पैर रखने की बात कही है जिन्हें ‘पंजशीर का शेर’ कहा जाता था। मसूद ने कहा है कि घाटी में उनके पिता के समय से जुटाए गए हथियार हैं क्योंकि यह हमेशा से पता था कि ऐसा दिन आएगा। उन्होंने कहा कि यहां के मुजाहिदीन लड़ाके फिर से तालिबान के खिलाफ लड़ने को तैयार हैं।

उन्होंने माना है कि तालिबान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत पड़ेगी क्योंकि तालिबान घाटी के अंदर खाने और अहम सामान की आपूर्ति में रोड़ा लगा सकता है। पंजशीर फिलहाल तालिबान की पहुंच से दूर है और यहां गठबंधन का झंडा भी फहराया गया है। हालांकि, इसके आसपास लड़ाई जारी है और तालिबान को कड़ी चुनौती मिल रही है।


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