सुप्रीम कोर्ट ने बंद स्कूल के शिक्षकों को बकाया वेतन देने का दिया आदेश


नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल के शिक्षकों को बकाया वेतन की 70 प्रतिशत धनराशि देने का आदेश दिया है। सरकार को यह धनराशि चार सप्ताह के भीतर चुकानी होगी। शीर्ष न्यायालय का फैसला 2011 में बंद हुए स्कूल के संबंध में आया है। जस्टिस आरएफ नरीमन और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने राज्य के शिक्षा विभाग के उन अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की प्रक्रिया भी रोक दी जिन पर सुप्रीम कोर्ट के 2019 के आदेश का पालन न करने का आरोप था। उक्त आदेश में शिक्षकों को उनके वेतन की 70 प्रतिशत राशि का भुगतान करने के लिए कहा गया था। 

पीठ ने अपने आदेश में लिखा है कि ट्रस्ट के द्वारा चलाए जा रहे स्कूल को छठे वेतन आयोग की सिफारिश के अनुसार वास्तव में 52.26 लाख रुपये की धनराशि का भुगतान करना था, लेकिन राज्य सरकार ने केवल 10.41 लाख रुपये का भुगतान किया। इसलिए अब राज्य सरकार को बाकी के 41.85 लाख रुपये चार सप्ताह के भीतर देने के लिए कहा गया है।   बिशंभर लाल माहेश्वरी एजूकेशन फाउंडेशन की ओर से कोर्ट में पेश अधिवक्ता दुष्यंत पाराशर ने कहा, 2019 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का राज्य सरकार ने पालन नहीं किया है। जबकि अनुच्छेद 142 के अनुसार राज्य सरकार के लिए वह बाध्यकारी था। इसके बाद पीठ ने 2019 के अपने आदेश और अन्य निर्देशों को चार सप्ताह में पूरी तरह से लागू करने के लिए कहा। गौरतलब है कि राजस्थान में अभी स्कूल खुलने की संभावना नहीं है। कोरोना की तीसरी लहर सितंबर माह में आने की आशंका को देखते हुए चिकित्सा विशेषज्ञों ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को फिलहाल स्कूल नहीं खोलने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों की वैक्सीन आने तक स्कूल नहीं खोले जाने चाहिए। पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बच्चों की वैक्सीन आ जाए और करीब 60 फीसद बच्चों को वैक्सीनेशन हो जाए, तब ही स्कूल खोले जाने चाहिए। सीएम ने भी विशेषज्ञों की सलाह पर सहमति जताई है। कई राज्यों में स्कूल खोले जाने के बाद वहां बच्चों के संक्रमित मिलने की बात भी सीएम को बताई गई है। विशेषज्ञों ने सीएम से कहा कि कॉलेज और यूनिवर्सिटी खोले जा सकते हैं, लेकिन स्कूल खोलना ठीक नहीं है।


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