तालिबान के शिकंजे में अफगानिस्तान

कई प्रांतों पर कब्जा   


काबुल

सत्ता साझा करने के प्रस्ताव को धता बताते हुए तालिबान ने अफगानिस्तान के प्रांतों पर बम बरसाना जारी रखा है और वो काबुल से महज़ 80 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है। शांति वार्ता समिति नया मसौदा तैयार करने में लगी हुई है, जिसमें राष्ट्रपति अशरफ गनी की सरकार की पूरी तरह से बेदखली हो सकती है।  अफगानिस्तान में युद्ध विराम के लिए जिस नए फार्मूले पर काम हो रहा है, उसके तहत गनी प्रशासन को पीछे हटना होगा।

तालिबान 7 दिन में अफगानिस्तान के दूसरे सबसे बड़े शहर कंधार समेत 13 प्रांतों पर कब्जा कर चुका है। वहीं, तालिबान के खिलाफ लड़ने वाले लोग भी अब सरेंडर करने लगे हैं। अफगानिस्तान के हेरात प्रांत के गर्वनर रहे इस्माइल खान इस वक्त तालिबान के कब्जे में हैं। वे तालिबान के खिलाफ लड़ने वाले प्रमुख लोगों में शामिल थे, लेकिन अब उन्होंने तालिबान के आगे सरेंडर कर दिया है।

बता दें, इस्माइल खान अफगानिस्तान में भारत के करीबी दोस्त थे। उन्होंने हेरात में भारत की मदद से बने सलमा बांध के निर्माण में अहम भूमिका निभाई थी।

सूत्रों ने बताया है कि तालिबान से जंग के बाद इस्माइल खान और उनके सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया। वे तालिबान के लड़ाकों के साथ अपने घर में हैं। उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा है कि तालिबान उनके साथ सही बर्ताव कर रहा है। इस्माइल खान के अलावा अफगानिस्तान सरकार में उप-गृहमंत्री रहमान और हेरात प्रशासन के प्रमुख और जफर कोर के प्रमुख कमांडर खयाल नबी अहमदजई, हेरात के गवर्नर अब्दुल सबूर काने और नेशनल सिक्योरिटी डायरेक्टर हसाब सिद्दीकी भी तालिबान के सामने सरेंडर कर चुके हैं।

तालिबान के प्रवक्ता कारी मोहम्मद युसूफ ने कहा है कि इन सभी ने हजारों सैनिकों के साथ इस्लामी अमीरात से हाथ मिला लिया है। वहीं तालिबान का ये भी कहना है कि आत्मसमर्पण करने वाले इन सभी लोगों को जीवन की सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन के अधिकार का भरोसा दिया गया है।


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