नर्सिंग पाठ्यक्रम के लिए सीईटी नहीं

मुंबई

नर्सिंग पाठ्यक्रम एएनएम और एएनएम के लिए अब सामान्‍य प्रवेश परीक्षा (सीईटी) नहीं होगी, बल्कि 12वीं में मिले अंकों के आधार पर पाठ्यक्रमों में सीधे प्रवेश दिया जाएगा। यहां मंत्रालय में आयोजित महाराष्‍ट्र राज्‍य नर्सिंग एंड पैरामेडिकल शिक्षा मंडल की समीक्षा बैठक में चिकित्‍सा शिक्षा मंत्री अमित देशमुख ने कहा कि इस साल ऑक्सिलरी नर्सिंग मिडवाइफरी (एएनएम) यानी सहायक नर्सिंग मिडवाइफरी और जनरल नर्सिंग मिडवाइफरी (जीएनएम) पाठ्यक्रमों के लिए सामायिक प्रवेश परीक्षा (सीईटी) नहीं होगी। देशमुख ने कहा कि इसके पहले एएनएम और जीएनएम प्रवेश प्रक्रिया सीईटी में मिले नंबर के आधार पर होती थी, लेकिन इस साल से पाठ्यक्रमों में प्रवेश 12वीं में मिले नंबर के आधार पर होगा। उन्‍होंने कहा कि कोविड महामारी के काल में देश सहित राज्‍य में डॉक्‍टर्स के अलावा नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों का महत्व समझ में आया। आने वाले समय में सरकारी और निजी अस्पतालों में सेवा देने वाले नर्सों को न्यूनतम समान वेतन मिले, इस बारे में महाराष्‍ट्र राज्‍य नर्सिंग एंड पैरामेडिकल शिक्षा मंडल को पड़ताल करने की जरूरत है।    

 चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने कहा कि कितने मरीजों के पीछे एक डॉक्‍टर होना चाहिए, यह तय किया गया है, उसी तरह कितने मरीजों के पीछे एक नर्स होने चाहिए, यह भी स्‍पष्‍ट किया गया है। डॉक्टरों के साथ-साथ नर्स भी मरीजों के इलाज में अहम भूमिका निभाती हैं। देशमुख ने अन्य राज्यों की स्थिति का अध्ययन करने और इस संबंध में एक रिपोर्ट तैयार करने का भी सुझाव दिया। 

देशमुख ने कहा कि मेडिकल ही ऐसा एकमात्र क्षेत्र है, जिसकी जरूरत हर जगह पड़ती है। कोविड के बाद हम सभी ने मेडिकल क्षेत्र के महत्‍व को समझा है। आज स्‍कूलों में भी नर्स होना आवश्‍यक है। कारखाने, हवाई अड्डे, सार्वजनिक परिवहन ऐसी जगहों पर भी तत्काल इलाज के लिए नर्स का होना जरूरी है।


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