जीनोम सीक्वेंस, मुंबई में होगी विषाणुओं की जांच

अब पुणे नहीं भेजना पड़ेगा कोरोना का सैंपल


मुंबई

कोरोना के बदलते स्वरूप, डेल्टा प्लस आदि के जीनोम सिक्वेंसिंग की जांच करने के लिए अब लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। मनपा प्रशासन द्वारा कस्तूरबा अस्पताल स्थित लैब में  अमेरिका से मंगाई दो मशीन को यहां स्थापित किया गया है. जिससे अब मुंबई में इसकी आसानी जांच होगी और मरीजों का तत्काल  इलाज करने की सुविधा मिलेगी। इस आधुनिक मशीन का मंगलवार को राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से उद्घाटन किया।

उल्लेखनीय है कि कोरोना रोजाना अपना नया-नया रूप बदल रहा है।बदलते स्वरूप की जांच करने के लिए पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट आफ व्वायरॉलाजी में भेजना पड़ता था, जहां कोरोना विषाणु की जांच करने के लिए तीन-चार महीने का समय लगता था। कस्तूरबा अस्पताल में अमेरिका की एमटीओ चंद्रा फाउंडेशन ने दो मशीन  मनपा को दिया है। अमरीका के हावर्ड स्कूल के नेत्ररोग विशेषज्ञ  अलब्राइट स्टोनब्रिज ग्रुप ने छह करोड़ 40 लाख की मशीन मुफ्त में उप्लब्ध कराई है. इस मशीन से एक साथ 384 नमूनों की जांच की जा सकेगी और चार दिन में रिपोर्ट आ जाएगी। जिससे महामारी पर काबू पाने और इलाज करने में आसानी होगी। उद्घाटन अवसर पर मनपा आयुक्त इकबाल सिंह चहल, मनपा के अतिरिक्त आयुक्त सुरेश काकानी, नायर के डीन डॉ. रमेश भारमल एवं स्वास्थ्य विभाग की कार्यकारी अधिकारी मंगला गोमारे आदि उपस्थित थी।

स्पाइनल मस्कुलर का भी होगा इलाज  

स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) बच्चों में एक दुर्लभ बीमारी है जिससे बच्चों की मांसपेशियां विकसित नहीं होती है। इस रोग से ग्रस्त बच्चों को आजीवन अपंगता का सामना करना पड़ता है या उनकी मृत्यु भी हो जाती है। इसे ध्यान में रखते हुए, कैलिफोर्निया, संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित एक गैर-सरकारी संगठन, डायरेक्ट रिलीफ ने मनपा के नायर अस्पताल में स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी के रोगियों के इलाज के लिए मदद का हाथ बढ़ाया है। अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा विशेषज्ञों की एक समिति ने इस बीमारी से पीड़ित 17 मरीजों का चयन किया है। इन 17 मरीजों को स्पिनराजा देने का सारा आर्थिक बोझ डायरेक्ट रिलीफ उठाएगी। स्पिनराजा की एक खुराक की कीमत लगभग 87 लाख रुपये है, जो पहले वर्ष में लगभग छह करोड़ रुपये और उसके बाद हर साल तीन करोड़ 20 लाख रुपये है। 17 चयनित मरीजों को यह बेहद महंगा इलाज मुहैया कराने के लिए डायरेक्ट रिलीफ निगम के साथ सहयोग कर रही है। 'स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी' के इलाज की सुविधा नायर अस्पताल में शुरू की गई है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि इससे इन बच्चों को नई जिंदगी मिलेगी। इस सुविधा के साथ ही मुंबई में जीनोम सीक्वेंसिंग लैब भी स्थापित की गई है, जिसने कोरोना के खिलाफ लड़ाई को गति दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी जैसी पुरानी बीमारियों से बचाने की जरूरत है। इस बीमारी के इलाज का खर्च अरबों है। 


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