लाल किले से PM मोदी का चीन-पाक को सख्त संदेश

सबके प्रयास से हर मुकाम करेंगे हासिल


नई दिल्ली

देश आज 75वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर पर तिरंगा फहराया। लाल किले की प्राचीर से 8वीं बार देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने नया मंत्र दिया। उन्होंने सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास में अब ‘सबका प्रयास’ शब्द भी जोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक और एयरस्ट्राइक कर हमने अपने दुश्मनों को नए भारत के उदय का संदेश दिया है। इससे यह भी पता चलता है कि भारत कड़े फैसले ले सकता है।

एकजुटता ही हमारी ताकत

21वीं सदी में भारत के सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करने से कोई भी बाधा रोक नहीं सकती। हमारी ताकत हमारी जीवटता है, हमारी ताकत हमारी एकजुटता है। हमारी प्राणशक्ति, राष्ट्र प्रथम, सदैव प्रथम की भावना है।

आतंकवाद और विस्तारवाद से लड़ रहा है भारत

आज दुनिया, भारत को एक नई दृष्टि से देख रही है और इस दृष्टि के दो महत्वपूर्ण पहलू हैं। एक आतंकवाद और दूसरा विस्तारवाद। भारत इन दोनों ही चुनौतियों से लड़ रहा है और सधे हुए तरीके से बड़े हिम्मत के साथ जवाब भी दे रहा है।

धारा 370 को बदलने का फैसला ऐतिहासिक

धारा 370 को बदलने का ऐतिहासिक फैसला हो, देश को टैक्स के जाल से मुक्ति दिलाने वाली व्यवस्था- GST हो, हमारे फौजी साथियों के लिए वन रैंक वन पेंशन हो, या फिर रामजन्मभूमि केस का शांतिपूर्ण समाधान, ये सब हमने बीते कुछ वर्षों में सच होते देखा है।

ओबीसी कमीशन को मिला संवैधानिक दर्जा

त्रिपुरा में दशकों बाद ब्रू रियांग समझौता होना हो, ओबीसी कमीशन को संवैधानिक दर्जा देना हो, या फिर जम्मू-कश्मीर में आजादी के बाद पहली बार हुए बीडीसी और डीडीसी चुनाव, भारत अपनी संकल्पशक्ति लगातार सिद्ध कर रहा है।

नेशनल हाइड्रोजन मिशन की घोषणा

भारत की प्रगति के लिए, आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए भारत का ऊर्जा के लिए आत्मनिर्भर होना अनिवार्य है। इसलिए आज भारत को ये संकल्प लेना होगा कि हम आजादी के 100 साल होने से पहले भारत को ऊर्जा के लिए आत्मनिर्भर बनाएंगे। मैं आज तिरंगे की साक्षी में नेशनल हाइड्रोजन मिशन की घोषणा कर रहा हूं।

नागरिकों को नक्शा बनाने की नहीं थी आजादी

बेवजह के कानून खत्म करने जरूरी हैं। देश में 200 साल पहले का एक कानून चला आ रहा था, जिसकी वजह से देश के नागरिक को नक्शा बनाने की आजादी नहीं थी।

कृषि क्षेत्र में भी वैज्ञानिकों  की क्षमताओं का उपयोग

कोरोना के दौरान देश ने तकनीकी की ताकत और हमारे वैज्ञानिकों की सामर्थ्य और प्रतिबद्धता को देखा है। देश के हर क्षेत्र में हमारे वैज्ञानिक सूझबूझ से काम कर रहे हैं। समय आ गया है कि हम अपने कृषि क्षेत्र में भी वैज्ञानिकों की क्षमताओं और उनके सुझावों को भी जोड़ें।             

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