मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच लेटर वार

 महिला अत्याचार पर कोश्यारी का विशेष अधिवेशन बुलाने का सुझाव  ।  ठाकरे ने सुझाव ठुकराया, संसद का विशेष सत्र बुलाने की सलाह    


मुंबई

साकीनाका बलात्कार और हत्या की पृष्ठभूमि में महाराष्ट्र विधानमंडल के विशेष सत्र बुलाने के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के सुझाव पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और राज्यपाल के बीच लेटर वार छिड़ गया। राज्य विधानमंडल के विशेष अधिवेशन बुलाने के सुझाव को ठुकराते हुए उद्धव ठाकरे ने पलटवार करते हुए कहा कि राज्यपाल को महिलाओं की सुरक्षा और उन पर बढ़ते हमलों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए संसद का सत्र बुलाने का केंद्र से अनुरोध करना चाहिए।  

 महिला अत्याचार साकीनाका तक सीमित नहीं

मिली जानकारी के अनुसार राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर महाराष्ट्र में महिलाओं के बढ़ते अत्याचार को लेकर महाराष्ट्र विधानमंडल का दो दिवसीय विशेष सत्र बुलाने को कहा था। इसके जवाब में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की तरफ से लंबा खत लिखा गया है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि महिला अत्याचार का विषय केवल साकीनाका तक सीमित न होकर राष्ट्रव्यापी है, ऐसे में संपूर्ण देश की महिलाएं हमारी तरफ बड़ी आशा भरी नजरों से देख रही हैं। इसलिए राज्यपाल को देश की महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों को मात देने के लिए संसद का चार दिनों का विशेष सत्र बुलाने की मांग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से करनी चाहिए। साकीनाका की घटना पर चर्चा इसी विशेष सत्र में की जा सकती है।  

 विवाद पैदा कर सकता है आपका सुझाव

मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को लिखे अपने पत्र में कहा कि मैं आपकी भावनाओं को समझ सकता हूं। आप महाराष्ट्र के संवैधानिक प्रमुख पद पर हैं, लेकिन आपकी आत्मा एक राजनीतिक कार्यकर्ता की है। सरकार अपना काम कर रही है, ऐसे में अब विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाकर चर्चा करने का आपका सुझाव नया विवाद पैदा कर सकता है। सरकार विरोधी लोग विशेष सत्र बुलाने की मांग के चलते राज्यपाल के उनके सुर में सुर मिलाकर यही मांग करना एक संसदीय लोकतंत्र के लिए घातक है। राज्यपाल के रूप में आपने महिलाओं के अत्याचारों के बारे में चिंता व्यक्त की, यही चिंता हमारी भी है।

 आरोपी को होगी कड़ी सजा

मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून-व्यवस्था, महिलाओं के अधिकार, उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री के नेतृत्व में चलने वाली सरकार की है। इस संसदीय प्रथा परंपरा के ढांचे से आप भी गुजर चुके हैं। ऐसे में हमें आपके अनुभव का हमेशा फायदा हुआ है। साकीनाका इलाके में एक महिला पर अत्याचार कर एक नराधम ने उसकी हत्या कर दी। पुलिस महज दस मिनट में मौके पर पहुंची और आरोपी को फौरन पकड़ लिया। मुख्यमंत्री के रूप में मैंने तुरंत संबंधित पुलिस अधिकारियों की बैठक बुलाई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का स्टैंड लिया। यह केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाकर नराधम कानून की तरफ से कड़ी सजा दी जाएगी। ठाकरे ने पत्र में कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी कानूनी कदम उठाने के लिए पुलिस को सख्त निर्देश दिए गए हैं।

उत्तराखंड में बुलाएंगे विशेष सत्र?

मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि आपका गृह राज्य उत्तराखंड, देवभूमि के रूप में भी जाना जाता है। सरकारी आंकड़े दर्शाते हैं कि महिलाओं पर हमलों की घटनाओं में 150 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। क्या वहां विशेष सत्र बुलाया जा सकता है? ठाकरे ने लिखा कि पड़ोसी राज्य गुजरात में पिछले दो साल के दौरान 14,229 महिलाएं लापता हो गईं। गुजरात पुलिस की रिपोर्ट कहती है कि कम से कम 14 महिलाओं को रोजाना बलात्कार या यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। इतनी अधिक संख्या को देखते हुए, गुजरात में कम से कम एक महीने के सत्र की आवश्यकता है।

एक नई परंपरा शुरु हुई: पटोले  

इधर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष नाना पटोले ने राज्यपाल के पत्र की आलोचना करते हुए  कहा कि राज्यपाल विशेष अधिवेशन की मांग करे, यह एक नई परंपरा शुरू हो रही है। वहीं विधान परिषद में विपक्ष के नेता प्रवीण दरेकर ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बयान को  दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा है कि केंद्र की ओर उंगली करके राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारियों से नहीं बच सकती है। राज्यपाल को जवाब देने की बजाए उनकी चिंताओं को गौर से समझने और उस पर गंभीरता से अमल करने की जरूरत है।


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