अदालत में अध्यादेश टिका रहे, यही हमारी इच्छा: पाटिल

नहीं तो यह ओबीसी समाज की आंखों में धूल झोंकने जैसा

chandrakant patil

पुणे

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि स्थानीय निकाय संस्थाओं में ओबीसी के राजनीतिक आरक्षण के लिए महाविकास आघाड़ी सरकार की तरफ की तरफ से जारी होने वाला अध्यादेश अदालत में टिका रहे, ऐसी इच्छा है, लेकिन यह अध्यादेश अदालत में नहीं टिका तो यह ओबीसी समाज की आंखों में धूल झोंकने जैसा होगा।पुणे के नजदीक देहू में पत्रकारों से बातचीत करते हुए पाटिल ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने मार्च महीने में ओबीसी का राजनीतिक आरक्षण रद्द किया था। अदालत ने ओबीसी के एंपिरिकल डेटा एकत्रित कर उसके आधार पर ओबीसी आरक्षण का प्रमाण तय करने को कहा था। महाविकास आघाड़ी सरकार ने आरक्षण को बहाल करने के लिए अदालत के सुझाव के अनुसार अभी तक कुछ नहीं किया है। अब सरकार ने ओबीसी आरक्षण को बनाए रखने के लिए अध्यादेश निकालने का निर्णय लिया है। यही काम चार माह पहले किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि कई जानकारों को लगता है कि आघाड़ी सरकार ने ओबीसी के राजनीतिक आरक्षण के लिए अध्यादेश निकाला तो भी वह सुप्रीम कोर्ट में टिक नहीं पाएगा। सुप्रीम कोर्ट में यह अध्यादेश टिक नहीं पाया तो आघाडी सरकार का यह निर्णय का मतलब ओबीसी की आंखों में धूल फेंकने जैसा होगा।

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