तालिबान की छवि सुधारने में जुटे चीन-रूस-पाक

काबुल

अफगानिस्तान में छाए मानवतावादी संकट से निपटने के लिए कुछ देशों ने तालिबान पर नई छवि पेश करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया है। इसी मकसद से बुधवार को चीन, रूस और पाकिस्तान के विशेष प्रतिनिधि काबुल पहुंचे और तालिबान की नई सरकार के अधिकारियों और अफगान नेता हामिद करजई और अब्दुल्ला अब्दुल्ला से मुलाकात की। तीनों ही देशों के प्रतिनिधियों ने अफगानिस्तान में समावेशी सरकार के गठन, आतंकवाद से लड़ने के कदमों और मानवीय स्थिति पर चर्चा की। बता दें कि तालिबान की आतंकी गतिविधियों के चलते ही अब तक कोई भी देश खुलकर अफगान सरकार के समर्थन में नहीं उतरा है।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि तीन विशेष प्रतिनिधियों ने 21-22 सितंबर को काबुल का दौरा कर कार्यवाहक प्रधानमंत्री मोहम्मद हसन अखुंद, विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी, वित्त मंत्री तथा अंतरिम सरकार के अन्य उच्च-स्तरीय अधिकारियों से मुलाकात की। इसके अलावा उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई और पिछली सरकार में राष्ट्रीय सुलह परिषद के अध्यक्ष रहे अब्दुल्ला अब्दुल्ला के साथ भी बैठक में हिस्सा लिया।

अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद यह संभवत: पहली बार है जब कुछ विदेशी राजनियकों ने पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई और पूर्व मुख्य अधिकारी अब्दुल्ला अब्दुल्ला से मुलाकात की। इससे पहले तालिबान ने इन दोनों को घरों में ही नजरबंद कर दिया था। ये मुलाकात ऐसे समय में हुई, जब तालिबान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतेरेस को पत्र लिखकर अपने प्रवक्ता सुहैल शाहीन को संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान का नया दूत मनोनीत किया है। साथ ही उसने गुतेरेस से न्यूयॉर्क में चल रहे महासभा के 76वें सत्र में भाग लेने और उसे संबोधित करने की भी अनुमति मांगी है।


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