प्रगति की ओर बढ़ रहा महानंद

जितेंद्र मिश्रा


मुंबई

पिछले 54 साल पहले स्थापित महाराष्ट्र राज्य सहकारी दुग्ध संघ, यानी महानंद दूध राज्य का सबसे बड़ा सहकारी दूध संघ है। राज्य के 25 जिलों और 60 तालुका में करीब 85 संघ के सदस्य, तो 24 हजार से अधिक सहकारी दुग्ध समितियों और लाखों दूध व्यापारियों का एक नेटवर्क महानंद संघ से जुड़ा है। इनमें 30 हजार से ज्यादा महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा, महानंद की गोरेगांव, मुंबई, वाशी, पुणे, लातूर, नागपुर, चालीसगांव और वैभववाड़ी में उप-परियोजनाएं हैं। महानंद ने अतिरिक्त दूध प्रबंधन के लिए 30 टन प्रतिदिन की क्षमता वाला एक मिल्क पाउडर प्लांट भी स्थापित किया है। महानंद सहकारी दूध संघ के चेयरमैन रणजीत सिंह देशमुख ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में महानंद दूध संघ का पूरे देश में नाम होगा। विभाग के मंत्री सुनील केदार के प्रयास और मदद से जिस तरह संघ आगे बढ़ रहा है, उससे आने वाले समय में महानंद दूध संघ बहुत आगे जाएगा। देशमुख ने कहा कि शुरुआत में संघ प्रतिदिन लगभग 12 लाख लीटर दूध का प्रबंधन करती थी, महाराष्ट्र में महानंद सहकारी और गुजरात सहकारी दोनों को करीब एक साथ शुरू किया गया था, समय के साथ गुजरात सहकारी दूध संघ का विस्तार हुआ, लेकिन महाराष्ट्र में महानंद दूध सहकारी का नाम होते हुए भी विस्तार नहीं हुआ। चूंकि बिक्री क्षेत्र पर कोई सरकारी प्रतिबंध नहीं है, इसलिए कुछ विदेशी कंपनियों ने महाराष्ट्र के बाजार पर काफी हद तक कब्जा कर लिया था। देशमुख ने कहा कि महानंद महाराष्ट्र का एक ब्रांड है और यह महाराष्ट्र में दूध की पहचान है। देशमुख ने कहा कि चेयरमैन बनने, संघ को दोबारा आगे ले जाने के लिए हमारे प्रयत्न को देखते हुए उप मुख्यमंत्री अजित पवार मेरा उत्साह बढ़ाने के लिए मेरा सत्कार किया। इसके साथ उन्होंने नए जोश के साथ काम शुरू करने की सलाह दी। मौजूदा संघ की यह स्थिति है कि प्रतिदिन दो लाख लीटर दूध प्रबंधन किया जा रहा है। डेयरी कारोबार में हमारी उत्सुकता और कार्य को देखते हुए राज्य भर के डेयरी कारोबारियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।


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