आप छठ पूजा, रामलीला की भी जांच करेंगे?: तावडे

परप्रांतीयों के संबंध में मुख्यमंत्री का बयान ठीक नहीं। मुंबई मनपा में अगला महापौर भाजपा का बनेगा  


मुंबई

राज्य के पूर्व मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय सचिव विनोद तावडे ने साकीनाका रेप केस के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के उस बयान की तीखी आलोचना की है, जिसमें उन्होंने पुलिस को परप्रांतीयों और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने का आदेश दिया है। तावडे ने कहा कि मुख्यमंत्री ने एक गुनाहगार को किसी विशेष प्रदेश-जाति का स्टैंप लगाया है और मुख्यमंत्री पद पर बैठे किसी व्यक्ति को इस तरह का बयान देना शोभा नहीं देता। उन्होंने सवाल किया कि क्या पुलिस छठ पूजा और रामलीला की भी चेकिंग करेगी? वे हमारा महानगर में सदिच्छा भेंट के दौरान पूछे गए सवालों के जवाब दे रहे थे। तावडे ने कहा कि मुंबई महानगरपालिका में अगला महापौर भाजपा का होगा। आज की स्थिति में शिवसेना बैकफुट पर है।

गुनहगार का नहीं होता कोई जाति, धर्म, प्रदेश

भाजपा नेता ने कहा कि मुंबई पुलिस स्‍कॉटलैंड यार्ड पुलिस के बराबर मानी जाती है, उन्हें परप्रांतीय-उत्तर भारतीयों पर कड़ाई से नजर रखने के बजाय, यह कहा जाना चाहिए था कि 100 करोड़ का हफ्ता इकठ्ठा मत करो, अपनी ईमानदारी से काम करो, तो मुंबई का आम आदमी सुरक्षित रहता। तावडे ने कहा कि जो गुनहगार होता है, उसकी कोई जाति, धर्म, प्रदेश नहीं होता। गुनहगार एक गुनहगार होता है। शाहू, फुले और आंबेडकर के महाराष्ट्र में यह पहली बार हुआ है कि उसके मुख्यमंत्री ने एक गुनहगार को किसी प्रदेश, जाति का स्टैंप लगाया है। शिवसेना प्रमुख स्वर्गीय बाला साहेब ठाकरे के बेटे से यह अपेक्षा नहीं थी। सवाल यह है कि वे मुंबई को सुरक्षित रखना चाहते हैं या फिर मुंबई महानगरपालिका में शिवसेना को? क्या पुलिस छठ पूजा या रामलीला की भी चेकिंग करेगी?

बांग्लादेशी नजर क्यों नहीं आते ?

तावडे ने कहा कि अगर बाहर से आने वाले क्राइम करते हैं तो सबसे अधिक क्राइम बांग्लादेशी करते हैं, इस पर उनकी नजर नहीं है। जिस-जिस पुलिस स्टेशन के दायरे में बांग्लादेशी बसे हैं, वहां सबसे अधिक अपराध होता है। वे इसके बारे में कुछ नहीं कहते। केवल मराठी वोटरों को खुश करने के लिए ऐसी बातें करना ठीक नहीं है।    

मुंबई पुलिस की हालत खस्‍ता

मुंबई पुलिस से जुड़े सवाल के जवाब में तावडे ने कहा कि पिछले दो साल से पॉलिटिकल सिस्टम की वजह से मुंबई पुलिस की हालत खराब हुई है। बड़े दुर्भाग्य की बात है कि मुंबई पुलिस को बुलाकर कहा जाता है कि हर महीने 100 करोड़ रुपए का हफ्ता आना चाहिए। उसी समय पुलिस समझ जाती है कि यहां परफॉर्मेंस नहीं, यहां चाटुगिरी चाहिए। देवेंद्र फड़नवीस जब मुख्यमंत्री थे, तब मुंबई पुलिस में हुए नियुक्तियां देखिए। दत्ता फडसलगीकर को केंद्र से लाया गया। मुंबई में कहा जाता है कि कमिश्नर की नियुक्ति में 150 से 200 करोड़ रुपए का लेनदेन होता है, लेकिन भाजपा सरकार के वक्त दत्ता फडसलगीकर, सुबोध जायसवाल की नियुक्ति होना यही बताता है कि उस समय कैसी नान करेप्ट सरकार थी। इससे पुलिस कैडर का हौंसला बढ़ता है। यदि मुंबई पुलिस को पूरी छूट दी जाए तो उसकी क्षमता परफॉर्म करने की है, लेकिन पिछले दो साल से हर ट्रांसफर का हिसाब-किताब, हर पोस्टिंग के लिए एक रूट तय है और वह रूट तीन जगह के लिए होता है। यह पहली बार हुआ कि 10 डीसीपी की बदली हुई, लेकिन एक पार्टी से हिसाब-किताब नहीं हुआ, इसलिए बदली रोक दी गई। जो आदमी पैसे देकर पोस्टिंग पाता है, वह पैसे ही कमाता है, कोई मुफ्त में इन्वेस्टमेंट नहीं करता, वह इन्वेस्टमेंट तभी करता है, जब रिटर्न मिलता हो।    

योगी की अब्बा जान टिप्पणी का बचाव  

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के बयान का बचाव करते हुए विनोद तावडे ने कहा कि उन्‍होंने क्या गलत कहा? पिछली सरकारों के वक्त यूपी में कितने दंगे होते थे,आज एक दंगा नहीं होता। योगी जी ने अपनी सरकार में आने के बाद सबका साथ सबका विकास किया। कहीं भी मुस्लिम या अन्य जाति धर्म के लोगों पर अन्याय हुआ क्या? मुझे लगता है कि योगी जी जो को कहा है कि जिन्हें लेकर आप सर पर नाचे, उनके समय तो काफी दंगे हुए। आपकी जान नहीं बची। हमारे समय तो आपको पूरी सुरक्षा दी है। आपको वहां हर जिले को उद्योग का रूप देकर उसे बढ़ाने का प्रयास किया है। आपने जिसे अपना पॉलिटिकल बाप माना उसके बारे में कहा। मुझे नहीं लगता कि यह नेगेटिव कहा।  

मोदी को रोकना है तो साथ बने रहना है

राज्‍य की महाविकास आघाड़ी सरकार कब तक चलेगी? इस सवाल के जवाब में तावडे ने कहा कि मध्यप्रदेश, कर्नाटक की अपेक्षा महाराष्ट्र की स्थिति थोड़ी अलग है। यहां विधायक टूटने से सरकार नहीं बनेगी। कोई एक पूरी पार्टी साथ आनी चाहिए। शिवसेना, कांग्रेस-राकांपा ने सोच रखा है कि किसी भी हालत मोदी को आने से रोकना है, इसलिए महाराष्ट्र में साथ बने रहना है। नारायण राणे की गिरफ्तारी का मामला देखिए। विरोध में केवल युवा सेना सड़क पर उतरी। प्रताप सरनाईक, सुनील प्रभु, संजय पोतनीस आए क्या? शिवसेना के पहले कैडर में कोई भी सड़क पर नहीं आया, क्योंकि उनका मानना है कि चार लोग मिलकर सरकार चला रहे हैं और हमारा कुछ नहीं हो रहा है। भाजपा के साथ युति थी तो कम से कम चाय तो मिलती थी, कुछ काम तो होते थे। ये खुलकर नहीं बोलते। इसी का नतीजा है कि कोई भी सड़क पर नहीं आया, नहीं तो ठाकरे के खिलाफ बयान आने के बाद पूरी शिवसेना सड़कों पर उतरनी चाहिए थी।

पवार साहब की यह पुरानी आदत

राकांपा अध्यक्ष शरद पवार के कांग्रेस के संबंध में दिए गए बयान पर उन्होंने कहा कि पवार साहेब कांच तोड़ते भी हैं तो उसे ठीक भी करते हैं। जब तक विवाद होते रहेंगे, तब तक उनकी जरूरत पड़ती रहेगी, इसलिए वे झगड़ा होने पर उसे निपटाते हैं। खिड़की रिपेयर करना उनकी पुरानी आदत है। मुंबई में रहते हुए दिल्ली से राजदीप सरदेसाई को बुलाकर इंटरव्यू देना उनकी इसी आदत का नतीजा है।

सरकार में अनुभव की कमी

तावडे ने कहा कि महाविकास आघाड़ी सरकार में अनुभव की कमी है। इंपिरिकल डेटा केंद्र को क्या देना है। सरकार का हाल यह है कि उसके हाथ में ढाल-तलवार सब कुछ है, फिर भी वह कह रही हैं कि बोझ काफी है, लड़े कैसे? आपकी सरकार है, आप हर चीज केंद्र से क्यों मांगते हो? यह नॉन सीरियस सरकार है, उन्हें बस अपनी कुर्सी बचाए रखनी है। अशोक चव्हाण राज्य के मुख्यमंत्री रहते हुए कितने विभाग संभाल चुके हैं, अब उनके पास पीडब्ल्यूडी जैसा विभाग है, वह भी आधा। वे इसी से संतोष कर रहे हैं तो यह लगता है कि वे कितने मजबूर है, उन्हें बस बने रहना है।

किसान नहीं आढ़तियों का आंदोलन

हरियाणा के प्रभारी विनोद तावडे का मानना है कि दिल्ली में जो आंदोलन चल रहा है उसे किसान आंदोलन कहना गलत है। दरअसल यह आढ़तियों का आंदोलन है। हरियाणा में किसानों को एमएसपी मिली है, यहां तक कि पंजाब से भी खरीदी की गई। यह मोदीजी के खिलाफ माहौल खड़ा करने का षडयंत्र है। 33 हजार करोड़ रुपए की खरीदारी होती है, उसमें से 10 प्रतिशत कमीशन के 3 हजार 300 करोड़ रुपए होते हैं, यह चले जाने की आशंका से यह आंदोलन चल रहा है। पहले इसमें पंजाब का सिख समुदाय शामिल हुआ, लेकिन अब वह भी इससे दूर चला गया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा के कुछ लोग हैं, जो सुबह जाते हैं और चार-पांच घंटे बाद वापस लौट आते हैं। उनकी सोच उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव तक आंदोलन चलाने की है।

शिवसेना बैकफुट पर

मुंबई में अगले साल होने वाले महानगरपालिका चुनाव पर तावडे ने कहा कि अगला महापौर भाजपा का होगा। उन्होंने कहा कि शिवसेना के साथ जाने से कांग्रेस का गैर मराठी वोट बैंक उसके हाथ से खिसक गया है। यदि हम उनका भरोसा जीतने में सफल रहे तो हमारे 4 से 6 प्रतिशत वोट बढ़ जाएंगे। पुराने शिवसैनिक यह देख रहे हैं कि मातोश्री पर राजीव गांधी को माला पहनाई जा रही है, वीर सावरकर को नहीं। हालांकि अभी वे कुछ बोल नहीं रहे हैं। आज की स्थिति में इतना तो पक्का है कि शिवसेना बैकफुट पर है।

शिवसेना-बीजेपी के साथ आने पर

भाजपा नेता ने कहा कि जब-जब शिवसेना पर कांग्रेस-राकांपा हावी होती है, तब स्मार्टली शिवसेना ये मैसेज छोड़ती है कि भाजपा के साथ जा रहे हैं, तब वो तुरंत चुप हो जाते हैं। कभी राकांपा कहती है कि वह भाजपा के साथ जा रही है। कभी शिवसेना कहती है कि भाजपा के साथ जा रहे हैं, लेकिन कोई साथ नहीं आएगा। सवाल यह है कि आप जिंदगी भर शिवसेना के साथ नहीं आएंगे?  राजनीति में कल का पता नहीं होता है। ऐसे में भाजपा प्रदेश चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि शिवसेना हमारे लिए अछूत नहीं है, इसका अर्थ यह नहीं है कि हम कल ही उनके साथ आ जाएंगे।


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