स्वर्णिम इतिहास लिखने की दहलीज पर सुहास


नोएडा

तोक्यो पैरालिंपिक खेलों के बैडमिंटन स्पर्धा के फाइनल में पहुंच कर ऐतिहासिक कारनामा करने वाले आईएएस सुहास एल. यथिराज आज जब इन खेलों के अपने आखिरी मुकाबले में उतरेंगे तो उनके पास इस उपलब्धि को स्वर्णिम बनाने का मौका होगा। फाइनल में अगर वह हार भी जाते हैं, तो रजत पदक के साथ गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) के 38 वर्षीय जिलाधिकारी (डीएम) पैरालिंपिक में पदक जीतने वाले पहले आईएएस अधिकारी के रूप में इतिहास बनाएंगे। सुहास एसएल4 श्रेणी में फिलहाल विश्व रैंकिंग में तीसरे स्थान पर हैं। उन्होंने शनिवार को सेमीफाइनल में जीत दर्ज करने से पहले यहां ग्रुप चरण तीन मैच खेले हैं। ग्रुप चरण के एक मुकाबले को छोड़कर अब तक खेले तीनों मैचों में उनका प्रदर्शन दबदबा वाला रहा है। पहले दो मैचों को 20 मिनट से भी कम समय में अपने नाम करने वाले सुहास ने सेमीफाइनल में इंडोनेशिया के फ्रेडी सेतियावान को 31 मिनट में 219, 21 -15 से हराया। अब उनका सामना शीर्ष वरीयता प्राप्त फ्रांस के लुकास माजूर से होगा। कर्नाटक के 38 वर्ष के सुहास के टखनों में विकार है। कोर्ट के भीतर और बाहर कई उपलब्धियां हासिल कर चुके सुहास कम्प्यूटर इंजीनियर है और 2007 बैच के आईएसएस अधिकारी भी। वह 2020 से नोएडा के जिलाधिकारी हैं और कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में मोर्चे से अगुआई कर चुके हैं। सेवारत और सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारियों के समूह आईएएस संघ ने ट्वीट किया ​िक इतिहास बन रहा है। सुहास एल वाई (आईएएस, डीएम जीबी नगर (नोएडा), उत्तर प्रदेश, भारत) पुरुष एकल पैरा-बैडमिंटन एसएल4 वर्ग के फाइनल में। उन्होंने सेमीफाइनल में इंडोनेशिया के एस फ्रेडी को 2-0 से हराया।


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