मुफ्त टीकाकरण के जाल में फंसे निजी अस्पताल

432 करोड़ के टीके के एक्सपायर होने का खतरा


नई दिल्ली

कोरोना संक्रमण के बाद शुरू हुए टीकाकरण अभियान की बढ़ती गति की वजह से हेल्थ सेक्टर की कई निजी कंपनियों के सामने परेशानी की स्थिति बन गई है। इस टीकाकरण अभियान में भारत सरकार ने सरकारी स्तर पर टीकाकरण करने के साथ ही निजी अस्पतालों के जरिए भी टीकाकरण कराने की छूट दी थी, लेकिन यही छूट अब निजी अस्पतालों के लिए जी का जंजाल बन गई है और उनकी करोड़ों रुपए की पूंजी फंस गई है। बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार द्वारा देशभर में मुफ्त टीकाकरण कराने का ऐलान करने के बाद से अब निजी अस्पतालों के स्टॉक में पड़े कोरोना के टीके का बड़ा हिस्सा बिना उपयोग के ही पड़ा हुआ है। इससे न केवल इन टीकों के एक्सपायर होकर बरबाद होने का खतरा बन गया है, बल्कि निजी अस्पतालों का भी काफी पैसा फंस गया है। जानकारों के मुताबिक पूरे देश में निजी अस्पतालों के स्टॉक में अभी करीब 432 करोड़ रुपए के कोरोना के टीकों का स्टॉक पड़ा है, जिनके उपयोग नहीं होने की स्थिति में एक्सपायर होकर बेकार हो जाने की आशंका जताई जा रही है।

 दिल्ली के एक प्रमुख निजी अस्पताल के मार्केटिंग विभाग के अधिकारी के मुताबिक टीकाकरण अभियान में निजी अस्पतालों को शामिल करने की इजाजत मिलने के बाद कई अस्पतालों ने टीका का बड़ा स्टॉक इकट्ठा कर लिया था। शुरुआती दौर में जब टीके की किल्लत बनी हुई थी, तब बड़ी संख्या में लोगों ने भीड़-भाड़ से बचने के इरादे से निजी अस्पतालों में जाकर सरकार द्वारा तय बाजार भाव का भुगतान करके टीका लगाया भी था।


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