भारतीय थाली की अवधारणा सबसे सेहतमंद


भारत में अभी पोषण माह मनाया जा रहा है। इसके साथ ही भारत के विविधतापूर्ण और स्‍वादिष्‍ट क्षेत्रीय व्‍यंजन नवाचार, स्‍वाद और सुगंध से अपना महत्‍व बढ़ा रहे हैं। आपके पोषण के लिये इन गुणों को प्रोटीन के साथ मिलाया गया है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, लोगों को वृहद एवं सूक्ष्‍म पोषक तत्‍वों का उचित संतुलन बनाने के लिए तरह-तरह के खाद्य पदार्थों का सेवन करने की जरूरत है, क्‍योंकि आहार में विविधता से पोषकतत्‍वों की उपलब्‍धता बढ़ती है।

रोज के खाने में छोटे-छोटे बदलावों से बिना किसी अतिरिक्‍त खर्च के पौष्टिक आहार के सेवन में सुधार किया जा सकता है और समुदाय की आहारीय आदतों को बदले बिना बेहतर पौष्टिक परिणाम मिलते हैं। उदाहरण के लिए, रोटी के लिए गेहूं के आटे में सोयाआटा मिलाएं, आलू की जगह अंडे खाएं और मिलेट्स को डाइट में शामिल करने से 404 किलोकैलोरी की अतिरिक्‍त एनर्जी मिलती है। इसमें 18 ग्राम अतिरिक्‍त प्रोटीन, 400 मिलीग्राम अतिरिक्‍त कैल्शियम, 10 ग्राम अतिरिक्‍त आयरन,152 मिलीग्राम अतिरिक्‍त मैग्‍नीशियम, 5 मिलीग्राम अतिरिक्‍त जिंक, 50 µg अतिरिक्‍त फोलिक एसिाड भी होता है। यदि इन बदलावों को घरेलू स्‍तर पर नियमित तौर पर अपना लिया जाए तो इसके बहुत अच्‍छे परिणाम मिल सकते हैं। भारतीयों में प्रोटीन का सेवन करने की मात्रा भी कम रहती है। एक संपूर्ण भोजन में दाल, सोयाबीन, अंडे, पोल्‍ट्री, नट्स, एवं बीज आदि जैसे प्रोटीन से भरपूर मात्रा वाले खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए। दरअसल, हमारे डेली मील का एक चौथाई हिस्‍सा प्रोटीन का होना चाहिए। पॉल्‍ट्री ढाबा से पावर्ड और यूएसएसईसी (यू.एस. सोयाबीन एक्‍सपोर्ट काउंसिल) द्वारा समर्थित इस पहल में भारत के हर राज्‍य से 28 स्‍वादिष्‍ट और संपूर्ण पोषण देने वाली क्षेत्रीय थालियों का एक बेहतरीन संकलन प्रस्‍तुत किया गया। हर थाली बैलेंस्‍ड डाइट की पूरक थी। इसका उद्देश्‍य था प्रोटीन की पर्याप्‍त मात्रा वाले संतुलित आहार पर रोशनी डालना। ऐसे प्रोटीन, जो इम्‍युनिटी और सेहत बनाते हैं, और आप तंदुरुस्‍त रहते हैं।

थाली का कॉन्‍सेप्‍ट खान-पान की पोषक पद्धति को सामने लाने के लिये था। पूरी दुनिया में लोग फ्राइज और कुकीज और पता नहीं क्‍या-क्‍या खाते रहते हैं। हालांकि भारतीय होने के नाते हमें थाली के कॉन्‍सेप्‍ट को सम्‍मान देना चाहिये, क्‍योंकि हमारी बाल पीढ़ी को भोजन के इस तरीके का महत्‍व बताना जरूरी है। उनका सामना कई तरह के जंक और फास्‍ट फूड से होता है, जिनसे मेटाबॉलिज्‍म की बीमारियाँ और गैर-संक्रामक रोग हो सकते हैं। इसके पीछे प्रयास स्‍थायी और पारंपरिक भोजन प्रणाली को अपनाने का है, जिससे हर कोई पोषित हो सकता है। साथ ही हमारे रोज की डाइट में प्रोटीन की सही मात्रा शामिल की जानी चाहिये।

सबसे महत्‍वपूर्ण, विभिन्‍न राज्‍यों के विविधतापूर्ण व्‍यंजनों वाली “हमारी प्रोटीन थाली’’ को भारत के मशहूर पोषण विशेषज्ञों और संस्‍थाओं का समर्थन प्राप्‍त है। उन्‍होंने बैलेंस्‍ड डाइट (संतुलित आहार) के लिये बड़ी सावधानी से आहारीय आवश्‍यकताओं को मिलाया है। उदाहरण के लिये, एक सामान्‍य मराठी थाली में शाकाहारी और मांसाहारी, दोनों तरह के भोजन होते हैं, जैसे चिकन, अंडा, आदि, जो उसे ताकतवर थाली बनाते हैं! उच्‍च प्रोटीन वाली ठेठ मराठी शाकाहारी और मांसाहारी थालियां प्रोफेसर डीटी कामना देसाई और डीटी पूर्णिमा पाटिल ने बनाई थीं।  इस अनूठी पहल के बारे में डॉ. सुभद्रा मंडालिका (कन्‍वेनर,एनएसआइ मुंबई चैप्‍टर एवं एसोसिएट) ने कहा, “इसमें कोई संदेह नहीं कि भारत का पारंपरिक खाना न सिर्फ सेहतमंद होता है बल्कि यह काफी स्‍वादिष्‍ट भी होता है और इसके कई स्‍वास्‍थ्‍य लाभ भी होते हैं। भारतीय भोजन मानव शरीर में इम्‍युनिटी, ग्रोथ, दिमाग के फंक्‍शन और कई अन्‍य फंक्‍शंस को सपोर्ट करता है। भारत में मौजूद तरह-तरह के फूड्स, मसाले और पकवान भारतीय भोजन को दुनिया का सबसे समग्र भोजन बनाते हैं। यह सर्वविदित है कि भारतीय थाली की अवधारणा सबसे सेहतमंद है।


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