तालिबान के खतरे को लेकर भारत अलर्ट


नई दिल्ली

अफगानिस्‍तान में तालिबान सरकार से किसी भी संभावित सुरक्षा खतरे को कम करने के लिए एनएसए अजित डोभाल ने सीआईए प्रमुख विलियम बर्न्स के साथ विचार-विमर्श करने के एक दिन बाद बुधवार को अपने रूसी समकक्ष जनरल निकोले पेत्रुशेव के साथ बातचीत की। पहली बार अफगानिस्तान की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई, जिसमें विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियां शामिल थीं। जानकारी के अनुसार बर्न्स, पेत्रुशेव और यूके के सीक्रेट इंटेलिजेंस सर्विस (MI6) के प्रमुख रिचर्ड मूर पिछले कुछ दिनों में भारत आने वाले कई प्रमुख खुफिया और सुरक्षा अधिकारियों में से थे। उन्‍होंने तालिबान को वादों पर कायम रहने की जरूरत पर सहमति जताई। 

तालिबान के सत्ता पर कब्जा करने के बाद अजित डोभाल और पत्रुशेव की बातचीत में भारत, रूस और मध्य एशियाई क्षेत्र के लिए सुरक्षा स्थि‍तियों पर बातचीत की, क्योंकि अफगानिस्‍तान में युद्ध के दौरान जैश-ए-मुहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा सहित कई खूंखार आतंकवादी समूहों की युद्ध में मजबूत उपस्थिति थी।

भारत ने अफगानिस्तान में लश्कर और जैश जैसे आतंकी समूहों के साथ पाकिस्तान के आईएसआई के संबंधों पर प्रकाश डाला। भारत ने अफगानिस्तान में हिंदुओं और सिखों सहित अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता व्यक्त की। 

भारत ने अफगानिस्तान में सक्रिय तालिबान और अन्य अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी समूहों के साथ पाकिस्तान के संबंधों पर जोर दिया। यह सुनिश्चित करने के लिए पाकिस्तान की विशेष जिम्मेदारी है कि अफगानिस्तान की धरती का उपयोग आतंकवाद फैलाने के लिए नहीं  किया जाएगा। अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद अफगानिस्तान के घटनाक्रम पर भारत सभी प्रमुख शक्तियों के संपर्क में है। अफगानिस्‍तान में तालिबान द्वारा कब्‍जा करने के तीन हफ्ते बाद कार्यवाहक सरकार का गठन किया गया। इसका नेतृत्व मोहम्मद हसन अखुंद करेंगे। 


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