राज्यपाल के पत्र का निकाला गया गलत अर्थः फड़नवीस

पिछले 25 साल में किसी सरकार ने राज्यपाल को नहीं लिखा ऐसा पत्र 

fadanvis

मुंबई

राज्यपाल कोश्यारी के पत्र के जवाब में मुख्यमंत्री उध्दव ठाकरे द्वारा लिखे गए पत्र की विपक्ष नेता देवेंद्र फड़नवीस ने निंदा की है। बुधवार को विपक्ष नेता ने कहा कि महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार पर अंकुश लगाने के लिए राज्य में शक्ति कानून को जल्द से जल्द लागू करने के लिए राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को दो दिन का विशेष सत्र बुलाने के लिए कहा था। राज्यपाल का उद्देश्य कोई आदेश देना नहीं बल्कि सुझाव देना था। उनके पत्र का गलत मतलब निकाला गया। उनका मंतव्य महिलाओं पर बढ़ते अपराध को नियंत्रण करने के लिए शक्ति कानून लागू करने के लिए था। सीएम के पत्र की निंदा करते हुए फड़नवीस ने कहा कि पिछले 25 साल से किसी सरकार ने राज्यपाल को ऐसा पत्र नहीं भेजा। मुख्यमंत्री को राज्यपाल को पत्र भेजने की बजाय राज्य की पुलिस को सख्त कार्रवाई करने का आदेश और राज्य में शक्ति कानून लागू करने पर विचार करना चाहिए था। राज्यपाल का निर्णय राज्य हित में 

ओबीसी समाज राजनीतिक आरक्षण को लेकर आघाड़ी सरकार ने अध्यादेश निकालने का निर्णय लिया है, जिसे सर्वसम्मति से पास करने के बाद राज्यपाल के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा गया था, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय में मामला लंबित होने का हवाला देते हुए राज्यपाल ने अध्यादेश पर रोक लगा दी है और सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। इस पर फड़नवीस ने राज्यपाल के निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि मुद्दा सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है, इसलिए न्यायालय के अनुमति के बिना अध्यादेश जारी नहीं किया जा सकता है। राज्यपाल ने जो भी निर्णय लिया है वो राज्य और समाज के हित में है। 


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