डोर-टू-डोर वैक्सीनेशन मुमकिन नहीं

supreme court

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट  ने कोरोना वायरस के खिलाफ घर-घर जाकर टीकाकरण के आदेश देने से इंकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि देश में टीकाकरण की प्रक्रिया ठीक चल रही है। ऐसे में ये आदेश जारी नहीं किए जा सकते हैं। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, विक्रम नाथ और हिमा कोहली की बेंच मामले की सुनवाई कर रही थी। हालांकि बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर 30 जुलाई से बीएमसी ने बिस्तर से उठने में अक्षम नागरिकों को वैक्सीन लगाने के लिए डोर-टू-डोर अभियान की शुरुआत की थी। शीर्ष अदालत ने कहा, ‘देश में कोविड की अलग-अलग स्थिति और प्रशासनिक जटिलताओं को देखते हुए डोर-टू-डोर टीकाकरण के आदेश देना मुमकिन नहीं है। खासतौर से तब जब टीकाकरण उचित प्रगति के साथ आगे बढ़ रहा है।’ तीन जजों की बेंच के समक्ष मुआवजे से जुड़ी एक और याचिका आई थी। इसमें कहा गया था कि कोविड से मौत के मामले को चिकित्सा में हुई लापरवाही मानते हुए मृतक के रिश्तेदार को मुआवजा देने की बात की गई थी। अदालत ने इस याचिका पर सुनवाई से इंकार कर दिया है। एपेक्स कोर्ट ने कहा कि कोविड के चलते इतनी बड़ी संख्या में हुई दुर्भाग्यपूर्ण मौतों का कारण चिकित्सा लापरवाही को नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा, ‘हम ऐसा अनुमान नहीं लगा सकते।’ साथ ही याचिकाकर्ता को केंद्रीय सरकार के प्रतिनिधित्व के माध्यम से उपाय सुझाने के लिए कहा गया है। बॉम्बे उच्च न्यायालय में मुंबई में बिस्तर पर रहने को मजबूर नागरिकों को घर जाकर टीका लगाने के निर्देश दिए थे। बीएमसी का कहना है कि इस प्रक्रिया के तहत वैक्सीन प्राप्त करने के लिए लाभार्थी को बीते 6 महीनों से बिस्तर पर होना जरूरी है। साथ ही उन्हें अपने डॉक्टर से ‘वैक्सीन के लिए फिट’ सर्टिफिकेट हासिल करना होगा। आवेदन के बाद घर पर टीकाकरण के लिए अपॉइंटमेंट तय किया जाता है और लाभार्थी या परिवार के अनुमति पर हस्ताक्षर के बाद डॉक्टर को स्थल पर 30 मिनट रहना अनिवार्य है।


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