दूसरे के स्क्रिप्ट पर काम कर रही है शिवसेना : चंद्रकांत पाटिल

chandrakant patil

मुंबई

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने शिवसेना पर तंज कसते हुए कहा कि वह दूसरे लोगों द्वारा तैयार की गई स्क्रिप्ट पर काम कर रही है। फ़िलहाल सरकार अपना काम करे, हम अपना काम करेंगे। रविवार को कोथरुड विधानसभा में आयोजित कार्यक्रम के बाद पाटिल ने कहा कि नारायण राणे केंद्रीय मंत्री हैं लेकिन उन्हें शब्दजाल के लिए गिरफ्तार किया गया था। शिवसेना प्रवक्ता और सांसद संजय राउत राणे से भी ज्यादा बुरा बयान देते हैं लेकिन उनके खिलाफ कारवाई क्यों नहीं की जाती। 

पाटिल ने आगे कहा कि अगर शिवसेना को अपनी ताकत बढ़ानी है तो उन्हें अपने एजेंडे पर काम करना चाहिए। लेकिन वे किसी के द्वारा दी गई स्क्रिप्ट के अनुसार काम करते हैं। पाटिल ने कहा कि राज्य में राकांपा का संगठन बढ़ रहा है और शिवसेना का कम हो रहा है। शिवसेना नेता और कार्यकर्ता राकांपा में शामिल हो रहे है। संजय राउत शरद पवार को मार्गदर्शक बता रहे है। राजू शेट्टी के आंदोलन पर पाटिल ने कहा कि विपक्ष नेता देवेंद्र फड़नवीस के कार्यकाल में जब पंचनामा पूरा नहीं हुआ तो उन्होंने तत्काल मदद की पेशकश की। अब पंचनामा के बावजूद सांगली-कोल्हापुर में आई बाढ़ के बाद भी बाढ़ पीड़ितों को मदद नहीं मिल रही है तो जनप्रतिनिधि आक्रामक  क्यों न हों। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार द्वारा कोविड पीड़ितों के लिए घोषित पैकेज का एक रुपया भी प्राप्त नहीं हुआ है।

राउत शिवसेना के लिए नहीं, राकांपा के लिए कर रहे है काम 

राउत 2014 से राकांपा के साथ सरकार बनाने के लिए काम कर रहे हैं। 2014 में शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस की कुल संख्या 144 तक नहीं पहुंच पाई थी इसलिए राउत उस वक्त कुछ नहीं कर पाए। साल  2019 में तीनों की संख्या 144 होने पर एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने का काम किया। दुर्भाग्यवश उध्दव ठाकरे को इस बात का एहसास नहीं है कि संजय राउत शिवसेना के लिए नहीं, बल्कि शरद पवार के लिए काम कर रहे हैं। एक तरह से राउत राकांपा को मजबूत कर रहे है। जबकि दूसरी ओर शिवसेना दिन-ब-दिन कमजोर होती जा रही है। राउत के उस बयान पर कि शरद पवार ने किसी की पीठ में छुरा नहीं मारा, के जवाब में पाटिल ने कहा कि पूरा राज्य जानता है कि वसंतदादा पाटिल के पीठ में खंजर किसने भोंका। ओबीसी आरक्षण पर पाटिल ने कहा कि सरकार नहीं चाहती है कि ओबीसी समुदाय को राजनीतिक आरक्षण मिले, इसलिए वे अलग-अलग काम करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। अब ओबीसी आरक्षण और कोविड का हवाला देकर मनपा चुनाव टाले जा रहे हैं। सरकार की मंशा एक प्रशासक नियुक्त कर मनपा संभालने की है। इच्छा हो तो एक महीने के भीतर भी ओबीसी समुदाय को राजनीतिक आरक्षण दिया जा सकता है।


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