रेहड़ी-पटरी वाले होंगे डिजिटल


नई दिल्‍ली

भारत को डिजिटल बनाने के प्रयास में सरकार लगातार कदम बढ़ा रही है। डिजिटल इंडिया कैंपेन के तहत भारत सरकार डिजिटल पेमेंट पर भी जोर दे रही है। भारत में फिलहाल उच्च वर्ग और मध्यम वर्ग के लोग बड़े स्तर पर डिजिटल पेमेंट करते हैं, जबकि निम्न वर्ग और छोटे व्यापारियों में डिजिटल पेमेंट को लेकर जानकारी की कमी साफ दिखाई देती है। यही वजह है कि केंद्र सरकार ने रेहड़ी-पटरी वालों को भी डिजिटल पेमेंट के जरिए भुगतान करने और लेने की ट्रेनिंग देने के लिए ‘मैं भी डिजिटल 3.0’ अभियान की शुरुआत कर दी है। इस अभियान में आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ मिलकर देश के 223 शहरों में PM स्वनिधि योजना के तहत स्ट्रीट वेंडर्स को ट्रेनिंग देंगे। आवास और शहरी मामले मंत्रालय के सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव अजय प्रकाश साहनी ने संयुक्त रूप से मिलकर एक वर्चुअल इवेंट में इस योजना को लॉन्च किया।

डिजिटल पेमेंट कंपनियां भी आईं साथ

सरकार की इन कोशिशों में फोनपे, पेटीएम, भारतपे समेत देश की अग्रणी डिजिटल पेमेंट कंपनियां भी साथ आई हैं। ये कंपनियां देश के अलग-अलग हिस्सों में स्ट्रीट वेंडर्स को डिजिटल पेमेंट, यूपीआई आईडी और क्यूआर कोड के बारे में ट्रेनिंग देंगी। इसके साथ ही उन्हें डिजिटल पेमेंट से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां उपलब्ध कराएंगी। जिससे रेहड़ी-पटरी पर दुकान लगाने वाले छोटे और कम शिक्षित व्यापारी भी डिजिटल पेमेंट करने और स्वीकार करने में दक्ष होंगे। केंद्र सरकार के निर्देशों पर स्ट्रीट वेंडर्स को कम ब्याज दर और मामूली शर्तों पर कर्ज भी दिया जा रहा है, ताकि वे अपने व्यापार को बढ़ा सकें। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अभी तक करीब 45.5 लाख स्ट्रीट वेंडर्स ने लोन के लिए आवेदन किया है, जिनमें से 27.2 लाख आवेदकों के कर्ज स्वीकृत किए जा चुके हैं।


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