स्कूल, मंदिर, थिएटर के बाद अब मुंबई लोकल का इंतजार


मुंबई

महाराष्ट्र सरकार ने 4 अक्टूबर से स्कूल, 7 अक्टूबर से धार्मिक स्थल और 22 अक्टूबर से थिएटर्स खोलने का फैसला किया है। अब मुंबईकरों की नजर मुंबई लोकल ट्रेन शुरू करने पर है। कोरोना संक्रमण कम होने की वजह से राज्य सरकार ने चरणबद्ध तरीके एक-एक चीज़ से प्रतिबंध हटाते हुए उन्हें खोलना शुरू किया। लेकिन स्कूल-कॉलेज, धार्मिक स्थल, सिनेमा- नाटकघर और मुंबई लोकल ट्रेन से जुड़े क्षेत्रों को खोला जाना बाकी था। इनमें से पहली तीन संस्थाओं को खोलने का फ़ैसला सरकार ने ले लिया है। अब मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली मुंबई लोकल ट्रेन सबके लिए कब से शुरू होगी, इस पर सबकी निगाहें लगी हुई हैं।

महाराष्ट्र में जिस तरह से कोरोना संक्रमण में कमी आई है, उसी तरह मुंबई में भी कोरोना संक्रमण कम हुआ है। इस वजह से मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास आघाडी सरकार ने 4 अक्टूबर से स्कूल, 7 अक्टूबर से मंदिर सहित सभी धार्मिक स्थल और 22 अक्टूबर से थिएटर्स खोलने का फैसला किया है। अब मुंबईकरों की ओर से सबके लिए मुंबई लोकल ट्रेन शुरू करने की मांग की जा रही है। फिलहाल वैक्सीन की दोनों डोज लिए हुए यात्रियों को ही मुंबई लोकल से सफ़र करने की इजाज़त है। कमाल की बात यह है कि लोकल ट्रेन में सफर के लिए निर्भर लोगों में से ज़्यादातर 18 से 40 की उम्र के हैं। जबकि दोनों डोज पाने वालों में ज्यादातर लोग 45 से अधिक उम्र के हैं। ज्यादातर अधेड़ और बुजुर्ग लोगों को रोज़ काम पर नहीं जाना पड़ता है। जिन्हें रोज़ अपने काम-धंधे के लिए बाहर निकलना पड़ता है, उनमें से कई लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज नहीं मिल पाई है।वैक्सीन की दोनों डोज ना ले पाने में आम मुंबईकरों की कोई ग़लती भी नहीं है। जब वैक्सीन की सप्लाई सही तरह से होगी तभी सबका वैक्सीनेशन भी तेजी से होगा। वैक्सीन की दोनों डोज नहीं ले पाने में जब इनकी ग़लती नहीं, तो लोकल ट्रेन में सफ़र की इजाज़त ना देकर इन्हें किस गुनाह की सज़ा दी जा रही है ?लोगों का कहना है कि राजनीतिक कार्यक्रम चल रहे हैं, पर्व त्योहार मनाए जा रहे हैं, बाजारों में भीड़ उमड़ रही है। जब यहां कोई रोक नहीं है तो सबके लिए मुंबई लोकल क्यों नहीं चल रही है ? आम मुंबईकरों की ठाकरे सरकार से यही मांग है कि वो मुंबई लोकल को सबसे लिए शुरू करे ताकि लोग काम-धंधा और कारोबार शुरू कर सकें। अपनी  ज़िंदगी को पटरी पर दौड़ा सकें। डेढ़ साल बाद एक बार फिर मुंबई लोकल से आ-जा सकें।


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