गोरखपुर में बाढ़ से तबाही

गोरखपुर

गोरखपुर में बाढ़ कहर बरपा रही है। यहां 15 दिन से सात तहसीलों के 354 गांव बाढ़ में डूबे हुए हैं। इससे ढाई लाख की आबादी पलायन करने को मजबूर हो गए। सबसे ज्यादा तबाही सदर तहसील में है। यहां 76 मोहल्ले बाढ़ से घिरे हुए हैं। करीब 50 हजार हेक्टेयर फसल बर्बाद हो गई है। झंगहा और चौरीचौरा में दो रिंग बांध और दो तटबंध टूट चुके हैं। इससे गोरखपुर-सोनौली हाइवे, गोरखपुर-वाराणसी हाइवे, गोरखपुर-खजनी हाइवे बंद है। हाइवे पर पानी भरा हुआ है। वाहनों को दूसरे रास्तों से भेजा जा रहा है। 35 गांवों की बिजली काट दी गई है। यहां प्रशासन ने बाढ़ में फंसे 72 लोगों को रेस्क्यू किया है। हालात बहुत ज्यादा भयावह है। लोगों का कहना है कि बाढ़ से ऐसी बर्बादी 23 साल पहले 1998 में देखने को मिली थी। तब 14 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए थे। गोरखपुर में बाढ़ की विभीषिका को ड्रोन से कैद किया गया। हर तरफ सैलाब नजर आया। गोरखपुर में राप्ती और रोहिन नदियों का जलस्तर घट रहा है। हालांकि, अब भी ये नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। 

राप्ती नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 3 मीटर ऊपर है। वहीं, रोहिन नदी भी खतरे के निशान 82 मीटर से करीब 3 मीटर ऊपर 85 मीटर पर बह रही है।गोर्रा, घाघरा भी उफान पर हैं। प्रशासन और सिंचाई विभाग तटबंधों पर नजर बनाए हुए हैं। कुछ जगह रिसाव के मामले सामने आए। जिला प्रशासन का दावा है कि रिसाव वाले बांधों को ठीक कर लिया गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि 48 से 72 घंटों के बाद बाढ़ की भयावह स्थिति से कुछ और राहत मिलेगी।

सदर तहसील में शहर के ज्यादातर मोहल्ले पानी से घिरे हैं। लोगों के घर पूरी तरह से डूब चुके हैं। ऐसे में किसी ने गांव की सड़कों पर तो किसी ने ट्रैक्टर-ट्रॉली में और किसी ने ठेले पर अपना आशियाना बनाया है।

बाढ़ से हालत इतने खराब हैं कि किसी तरह खुद को जिंदा रखे लोग इस आपदा में जान गंवाने वाले अपनों का दाह संस्कार भी मुश्किल से कर पा रहे हैं। दाह संस्कार बांध पर करना पड़ रहा है।


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