बिजली संकट की ओर बढ़ रहा महाराष्ट्र


मुंबई

देश का अग्रणी औद्योगिक राज्य महाराष्ट्र बिजली संकट की ओर धीरे-धीरे बढ़ा रहा है। अगस्त 2021 तक बिजली का बकाया बिल 74,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। बकाया बिलों की वसूली नहीं होने से बिजली की आपूर्ति करने वाली सरकारी कंपनी महावितरण बहुत बुरे दौर से गुजर रही है। हालत इतनी खराब है कि बिजली का प्लांट चलाने के लिए उसके पास कोयले की कमी हो गई है।

कंपनी ने साफ कहा है कि सरकार ने अगर आर्थिक मदद नहीं की, तो पूरे राज्य की बत्ती गुल हो सकती है। इस संकट के लिए ऊर्जा मंत्री नितिन राउत पिछली फड़नवीस सरकार को दोषी ठहराते हैं। उनका आरोप है कि पिछली सरकार ने बिलों की वसूली नहीं की, जिससे महाराष्ट्र के सामने यह संकट खड़ा हो गया है।

महावितरण ने एक प्रजेंटेशन देकर साफ किया है कि उनकी आर्थिक सेहत खराब हो चुकी है। बिजली का बकाया 74,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। बिजली के बिलों की वसूली के लिए जब उनके लोग मैदान में उतरते हैं, तो सरकार की ओर से रोक दिया जाता है। अब उनके सामने दो पयार्य हैं- एक, बकाया बिलों की वसूली को गति मिले और दूसरा, सरकार आर्थिक मदद करे। हालत इतनी खराब है कि प्लांट चलाने के लिए पैसा नहीं है। बिजली के बकाया बिल में सबसे पहले नंबर पर कृषि क्षेत्र है, जिस पर 49,575 करोड़ रुपए बकाया है।

किस क्षेत्र पर कितना बकाया (करोड़ में)

क्षेत्र  सितंबर 2020

औद्योगिक 2,917

वाणिज्यिक 822

सार्वजनिक जल आपूर्ति 2,258

कृषि 49,575

घरेलू 3,264

स्ट्रीट लाइट 6,271

सार्वजनिक सेवा 235


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