अनुच्छेद 370 व्यवस्था में बदलाव, इसे दिल से स्वीकारने की जरूरत : भागवत


जम्मू

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डाॅ. मोहन भागवत ने जम्मू यूनिवर्सिटी के जनरल जोरावर सिंह सभागार में प्रबुद्ध जन गोष्ठी में कहा कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 का हटाना व्यवस्था में बदलाव है। मगर मानसिकता बदले बिना यह कार्य पूरा नहीं होगा। बहुत लोगों के संघर्ष, डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान को अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण के रूप में देखने का आनंद देश में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। परंतु केवल व्यवस्था बदलने से ही उद्देश्य पूरा नहीं होता।

भागवत ने कहा कि हम भारतीय हैं। हमारे निजी स्वार्थों से राष्ट्र सबसे ऊपर है। राष्ट्रीयता की भावना से हम दुनिया को वह सब दे सकेंगे, जिसकी दुनिया हमसे उम्मीद कर रही है। कार्यक्रम के शुरू में ही डाॅ. मोहन भागवत ने कहा कि यह एकतरफा गपशप है। इसलिए बैठकर बोल रहा हूं। अनुच्छेद 370 के हटने में श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जम्मू-कश्मीर में योगदान और बलिदान को याद किया। बदलाव को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार वैसी ही मिलती है। जैसी लोग चाहते हैं। जैसे हम हैं, वैसे हमारे नेता हैं। हमारे अनुरूप व्यवस्था तब आएगी, जब हम बदलेंगे। व्यवस्था बनाने के लिए बहुत ज्यादा लोग चाहिए। बिगाड़ने के लिए बहुत कम। सुदृढ़ समाज तब बनता है, जब उनके सामने कोई उद्देश्य होता है। हमें अपने आपको समझना होगा। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने यह भी कहा कि हम सबसे पुरानी संस्कृति हैं। बड़े भाई की तरह हमें सबके लिए सोचना है। हम विश्वशक्ति नहीं, विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर हों। भारतीय संस्कृति के संरक्षण में कई पीढ़ियां लगी रही हैं। जिस संस्कृति की बात आज दुनिया सोच रही है, उस पर हम सदियों से चल रहे हैं। उन्होंने दुनिया की अंधी दौड़ की ओर इशरा करते हुए कहा कि सुख पदार्थों के भोग में नहीं, सुख अपने स्वयं के अंदर है। उन्होंने कहा कि यूनाइटेड किंगडम तब तक रहेगा, जब तक अंग्रेजी भाषा है। यूनाइटेड स्टेट्स तब तक रहेगा, जब तक स्टेट्स हैं। हम किसी स्टेट के तहत राष्ट्र नहीं बने।

 धर्म का रास्ता, स्वभाव, कर्तव्य, लोक-परलोक को मानने वाले हमारे राष्ट्र की विभिन्नता ही हमारी पहचान है। सर्वतर सुख में धर्म है। उस धर्म में सभी को देना पड़ता है। उन्होंने समाज को खोखला करने वाली छुआछूत जातपात के भेद को लंबे समय से चली आ रही बीमारी बताया। अपने आपको श्रेष्ठ मानने का अंहकार हमारी संस्कृति नहीं है। हमारी संस्कृति सनानत काल से चली आ रही है। दुनिया हमारी संस्कृति का पालन कर रही है। हमारी सबसे बड़ी खूबी आत्मीयता है। अपनेपन की भावना ने ही हमें एक अलग पहचान दी है। आज सारी दुनिया की नजरें हम पर टिकी हुई हैं। सबसे प्रचीन होने के नाते हम चाहते हैं कि जो भी आए हमारे चरित्र से कुछ लेकर जाए। पूरे देश में व्यवस्थाएं अलग हैं। भाषाएं हैं। रामायाण महाभारत भी कई भाषाओं में लिखी गई, लेकिन भाव एक ही है।


Post a Comment

[blogger]

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget