मुंबई में और 659 दवाखाने की जरूरत

कोरोना के अलावा अन्य बीमारियों से बढ़े मौत के मामले


मुंबई

कोविड संकट में हो रही मृत्यु को छोड़ कर अन्य बीमारियों से भी मुंबई में मौत का प्रमाण बढ़ा है। वर्ष 2019 में 91,221 लोगों की मृत्यु हुई थी, उसकी तुलना में वर्ष 2020 में मरने वालों की संख्या बढ़ कर 1,01,790 यानी 12 फीसदी की वृद्धि हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2020 में 11,116 मरीजों की मौत हुई जो इसमें शामिल नहीं है। मंगलवार को प्रजा फाउंडेशन ने मुंबई की स्वास्थ्य स्थिति पर अपनी रिपोर्ट में इसका खुलासा किया है। प्रजा फाउंडेशन का कहना है कि नेशनल बिल्डिंग कोड मानदंड के अनुसार प्रत्येक 15,000 की जनसंख्या पर एक डिस्पेंसरी होनी चाहिए। मुंबई में 858 डिस्पेंसरी की जगह केवल 199 डिस्पेंसरी है। अब भी शहर को 659 डिस्पेंसरी की आवश्यकता है। 

मुंबई में हमेशा स्वास्थ्य सेवा के लिए बजट में सार्थक प्रावधान होता है। 2021-22 में स्वास्थ्य बजट के लिए 4728 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे। बावजूद इसके कोरोना महामारी के दौरान सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थाएं चरमरा गई थी। मुंबई में स्वास्थ्य कमचारियों के 31 फीसदी पद रिक्त है। इस तरह की जानकारी प्रजा फाउंडेशन में सामने आई है। इंस्टीट्यूट फॉर पब्लिक हेल्थ के निदेशक मंगेश पेडनेकर ने कहा कि 2021-22 के कुल अनुमानित बजट में स्वास्थ्य विभाग को केवल 20 फीसदी बजट ही आवंटित

किया गया था, जिसमें नगरपालिका डिस्पेंसरियों, मातृत्व गृह और स्वास्थ्य केंद्र जैसी सभी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं। प्रजा फाउंडेशन लंबे समय से मनपा की डिस्पेंसरियों की संख्या बढ़ाने और अधिक समय तक शुरू रखने की वकालत कर रहा हैं। इस वर्ष मनपा ने एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत 15 डिस्पेंसरी को 14 घंटे के लिए चालू रखा है। प्रजा फाउंडेशन का कहना है कि मनपा को अपनी सभी डिस्पेंसरी को शुरू रखने की जरूरत है।

नवंबर-दिसंबर 2020 में एक प्रतिष्ठित अनुसंधान एजेंसी की तरफ से किए गए

सर्वे में मुंबई में 36 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्हें कोविड के दौरान गैर-कोविड इलाज  के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ा। सतत विकास लक्ष्य 2030 को भारत ने 2015 में अपनाया था, लक्ष्य तक पहुंचने के लिए केवल नौ वर्ष बचे हैं। टी.बी. जैसे रोगों के लिए एस.डी.जी का लक्ष्य है की एक लाख की आबादी में 0 टीबी मामले रहे, लेकिन 2020 में एक लाख की आबादी में टी.बी के 298 मामले पाए गए। वर्ष 2020 तक, मेडिकल और पैरा-मेडिकल स्टाफ में क्रमशः 44 और 45 प्रतिशत रिक्त पद है।


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