कैप्टन का खेल, कांग्रेस दंग!

कांग्रेस में नहीं रहूंगा, भाजपा में नहीं जाऊंगा     सिद्धू अच्छे आदमी नहीं, उन्हें कहीं से जीतने नहीं दूंगा


जालंधर

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक बार फिर साफ किया है कि वह कांग्रेस छोड़ रहे हैं। कैप्टन ने भाजपा में शामिल होने से भी इंकार किया है। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी को मैं सही समय पर अपना इस्तीफा भेज दूंगा।  कैप्टन के इस खेल से कांग्रेस दंग है। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि सुरक्षा के कई मुद्दे थे, जिन पर मैंने गृह मंत्री और NSA से बात की है। मैं 4 साल से देख रहा हूं कि पंजाब में क्या हो रहा है, इसके बारे में उन्हें बताया है। रोजाना ड्रोन आ रहे हैं। जो पकड़े जाते हैं, वो ठीक हैं लेकिन जो नहीं पकड़े जाते, वो कहां जा रहे हैं, इसके बारे में उन्हें बताया है।

कैप्टन ने कहा कि मैं पहले कह चुका हूं कि सिद्धू पंजाब के लिए सही आदमी नहीं है। वो जहां से भी लड़ेगा, मैं उसे नहीं जीतने दूंगा। 

चन्नी को नसीहत

अमरिंदर सिंह ने CM चरणजीत सिंह चन्नी को नसीहत दी है। कैप्टन ने कहा है कि साढ़े 9 साल के कार्यकाल के दौरान कभी पार्टी अध्यक्ष ने सरकार चलाने में दखल नहीं दिया और न ही मैने प्रधान होते हुए ऐसा किया। सरकार में अफसरों की नियुक्ति का काम मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का है, ना कि नवजोत सिंह सिद्धू का। कैप्टन ने G-23 के नेता कपिल सिब्बल के घर पर हुए हमले का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठों के साथ यह व्यवहार ठीक नहीं है। 

सिद्धू - चन्नी में नहीं बनी बात!

पंजाब कांग्रेस की कलह सुलझाने के लिए CM चरणजीत चन्नी और नवजोत सिद्धू की मीटिंग 2 घंटे चली। हालांकि इसमें कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। इतना जरूर है कि अब बड़े फैसले लेने के लिए तालमेल कमेटी बनेगी। यह कमेटी कांग्रेस हाईकमान बनाएगा। सूत्रों के मुताबिक इसमें नवजोत सिद्धू, CM चरणजीत चन्नी और ऑब्जर्वर हरीश चौधरी मेंबर हो सकते हैं। इस कमेटी की सप्ताह में एक मीटिंग होगी। जिसमें सरकार के बड़े फैसलों को लेकर चर्चा होगी। इसके जरिए संगठन और सरकार में टकराव को रोका जाएगा। 

कांग्रेस का डैमेज कंट्रोल: पार्टी नेतृत्व को लेकर विद्रोही रुख अपनाए जी-23 नेताओं की मांगों को लेकर कांग्रेस बैकफुट पर आ गई है। उसने डैमेज कंट्रोल के तहत कहा है कि जल्द ही CWC की बैठक आयोजित की जाएगी। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि इस बैठक में सारे विवादों का निपटारा किया जाएगा। कांग्रेस का यह बयान साबित करता है कि G-23 नेताओं की लामबंदी के चलते हाईकमान दो कदम पीछे हटकर सोचने पर मजबूर हुआ है।


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