ईंधन की ऊंची कीमतों ने बढ़ाया संकट


नई दिल्ली

वैश्विक स्तर पर जारी ऊर्जा संकट और ईंधन कीमतों में भारी इजाफे से आम आदमी की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। एशिया, यूरोप और अमेरिका में कोयले, प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल की कीमतें अपने रिकॉर्ड स्तर पर हैं। इससे दुनियाभर के लोगों को महंगाई का सामना करना पड़ रहा है, तो कई मिल-फैक्टरियों पर बंद होने का खतरा मंडराने लगा है।

यूरोप में छह गुना हुईं गैस की कीमतें

विश्व में गैस की औसत कीमत जनवरी से लेकर अब तक 250 फीसदी बढ़ी है, लेकिन गैस के दाम में सबसे ज्यादा इजाफा यूरोपीय देशों में हुआ है। यूरोप में जनवरी के मुकाबले अक्टूबर में गैस की कीमतें छह गुना हो गईं। यूरोप अपनी गैस जरूरत का 35 फीसदी आयात रूस से करता है, इसलिए रूस में गैस के महंगा होने से यूरोप में भी दाम बढ़ गए। यूरोपियन यूनियन के देशों में पिछले कुछ हफ्तों में बिजली दरों में भारी इजाफा देखा जा रहा है। स्पेन में तो दरें तीन गुना तक बढ़ गई हैं। दरों में इजाफे से यूरोप में आने वाली सर्दियां मुसीबत का सबब बन सकती हैं। सर्दियों में बिजली की डिमांड सबसे ज्यादा होती है। एशियाई देशों में भी ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं। ऊर्जा संकट के मद्देनजर विश्व में कच्चे तेल की प्रतिदिन की मांग बढ़कर ढाई लाख से साढ़े सात लाख बैरल तक हो सकती है, इससे तेल के दाम और बढ़ सकते हैं।

श्रीलंका में गैस सिलेंडर 2500 रुपए के पार

श्रीलंका में साढ़े 12 किलोग्राम वजनी रसोई गैस सिलेंडर का दाम दोगुना हो गया है। आवश्यक वस्तुओं के लिए मूल्य सीमा समाप्त करने की सरकार की घोषणा के बाद रसोई गैस के एक सिलेंडर की कीमत बढ़कर 2657 रुपए हो गई।

चीन में कोयला 223 रुपये प्रति टन

झेंगझाउ कामोडिटी एक्सचेंज पर प्रति टन कोयला का भाव बढ़कर 233.6 रुपये हो गया। कोयले की किल्लत और इसके रिकॉर्ड ऊंचे भाव से कई संयंत्रों को संकट का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते चीन में बिजली की कटौती की जा रही है। भारी बारिश के कारण 60 से अधिक कोयला खदानों के बंद होने और कोयला संकट गहराने से गैस और तेल की मांग बढ़ गई। इससे इनके दाम में काफी अधिक बढ़ोतरी हुई है।

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