भारत मजबूत आर्थिक सुधार की ओर


मुंबई

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहा कि भारत मजबूत आर्थिक पुनरुद्धार का अनुभव कर रहा है, और उसने अपनी मौद्रिक नीति में उदार बने रहने का फैसला किया है. आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की वार्षिक बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि भारत बहुत मजबूत आर्थिक सुधार देख रहा है, लेकिन अभी भी विभिन्न क्षेत्रों के बीच असमानता है। उनके भाषण के हिस्से को आईएमएफ ने जारी किया। इस वीडियो क्लिप में दास ने कहा, ‘‘इसलिए हमने अपनी मौद्रिक नीति में उदार बने रहने का फैसला किया है, जबकि साथ ही मुद्रास्फीति के परिदृश्य पर बारीकी से नजर रखी जा रही है।’’ रिजर्व बैंक इंडिया की स्थापना एक अप्रैल 1935 को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट 1934 के तहत हुई थी। शुरुआत में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का सेंट्रल ऑफिस कोलकाता में बनाया गया था, लेकिन सन 1937 में स्थायी रुप से मुंबई शिफ्ट हो गया। सेंट्रल ऑफिस में ही आरबीआई के गवर्नर बैठते हैं और पॉलिसी बनाई जाती है। सन 1949 में राष्ट्रीयकरण होने के बाद आरबीआई पूर्ण रुप से भारत सरकार के आधीन आता है। आरबीआई मॉनिटरी पॉलिसी के साथ भारत में कामकाज कर रहे बैंकों को भी रेगुलेट करता है। आरबीआई का भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान है। आरबीआई रुपए के उतार और फॉरेन एक्सचेंज को मैनेज करता है इसके अलावा महंगाई पर काबू करने के लिए आरबीआई पॉलिसी बनाता है.आरबीआई में एक गवर्नर और चार डिप्टी गवर्नर होते हैं. सर ओसबोन ए स्मिथ आरबीआई के पहले गवर्नर थे.हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की तरफ से जारी साप्ताहिक आंकड़ों में दर्शाया गया है कि 3 सितंबर को खत्म सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में यह बढ़ोतरी मुख्य तौर पर विदेशीमुद्रा आस्तियों (FCA) के बढ़ने की वजह से हुई है जो कुल मुद्राभंडार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।


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