देश में कोयले की कमी!

कोयले की किल्लत ने देश को बड़े बिजली संकट के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। देश के पावर प्लांट्स बंद होने के कगार पर हैं। इन पावर प्लांट्स को चलाने वाला कोयला जिस रफ्तार के खत्म हो रहा है, उससे ऐसी ही आशंका जताई जा रही है। आशंका है अगले कुछ दिनों में देश कई हिस्से अंधेरे में डूब सकते हैं। दिल्ली में बिजली सप्लाई करनेवाली कंपनियों ने लोगों को आगाह किया है। कंपनियों ने बताया है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो राजधानी में ब्लैक आउट हो सकता है। रांची समेत पूरे झारखंड में बिजली की किल्लत है। बिजली उत्पादन कम होने से घंटों बिजली की कटौती हो रही है। हालात ये है कि लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। बिजली की सप्लाई महज 1098 मेगावाट है। झारखंड में भारी बारिश के कारण कोयले का प्रोडक्शन घटा है। ऐसे में पावर प्लांट को कोयले की सप्लाई कम हुई है। नतीजा ये है कि बिजली का प्रोडक्शन कम हुआ है। पावर प्लांट्स को कोयले की सप्लाई दुरुस्त करने का अभी पुख्ता इंतजाम नहीं हुआ है। हालांकि झारखंड के अफसरों को को भरोसा है कि हालात सुधर सकते हैं। सिर्फ दिल्ली और झारखंड ही नहीं यूपी, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई इलाके भी बिजली कटौती का संकट झेल रहे हैं। कोयले की किल्लत और पावर प्लांट्स में प्रोडक्शन की कमी के कारण यहां भी बिजली की किल्लत है। सरकार बिजली संकट से निपटने के लिए एक्शन में है। कोयले से चलने वाले पावर प्लांट्स की मॉनिटरिंग की जा रही है। सरकार की कोशिश की है कि जल्द से जल्द कोल बेस्ड पावर प्लांट्स को कोयले की सप्लाई दुरुस्त की जाए, लेकिन समय कब कम है। अगर अगले 24 से 48 घंटे में हालात नहीं सुधरे तो देश का बड़ा हिस्सा ब्लैक आउट का शिकार हो सकता है।  आपके मन में ये सवाल जरूर जा रहा होगा कि आखिर ब्लैक आउट का संकट इतना बड़ा क्यों हैं। कैसे हम अंधेरे के करीब पहुंच गए हैं। ये हम आपको बताते हैं। देश में सप्लाई होनेवाली बिजली का 70 फीसदी थर्मल पावर प्लांट्स से आता है। देश में कुल 135 थर्मल पावर प्लांट्स हैं, इसमें बिजली उत्पादन के लिए जरूरी कोयला स्टॉक 1.4 मिलियन टन चाहिए होता है। थर्मल पावर प्लांट्स करीब 40 दिन का कोयला स्टॉक करके रखते हैं। इस साल सितंबर में भारत में थर्मल पावर प्लांट्स के पास करीब 81 लाख टन कोयले का स्टॉक था। ये पिछले साल के मुकाबले 76 फीसदी कम था। नतीजा ये हुआ है कि 15 थर्मल पावर प्लांट्स के पास कोयला खत्म हो गया है। 70 थर्मल पावर प्लांट्स के पास सिर्फ 24 घंटे का कोयला बचा है । 50 थर्मल पावर प्लांट्स के पास 5 दिन का कोयला बचा हुआ है। आप इस संकट को ऐसे समझिए की अगर देश में 100 यूनिट बिजली बनती है तो 70 यूनिट बिजली इन्हीं थर्मल यानी कोयले से चलनेवाले पावर प्लांट्स में बनती है और कोयले की कमी से यही पावर प्लांट्स इस वक्त बंद होने की कगार पर हैं। त्योहारी सीजन होने के कारण हर साल सितंबर-अक्टूबर के महीने में बिजली की मांग बढ़ती है, इसलिए थर्मल पावर प्लांट्स में पहले से ही कोयले का स्टॉक रखा जाता है, लेकिन इस साल कोयले का संकट खड़ा हो गया है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि मॉनसून देर से खत्म हुआ इस कारण कोयले का प्रोडक्शन घटा कोयले की खदानों में पानी भरने से प्रोडक्शन कम हुआ खराब मौसम के कारण कोयला ट्रांसपोर्ट करने में परेशानी हुई है। भारत के पास 300 अरब टन का कोयला भंडार है, लेकिन फिर भी बड़ी मात्रा में कोयले का इंपोर्ट किया जाता है।

भारत ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया समेत कई देशों से कोयला इंपोर्ट करता है। सरकार ने संकट से निपटने के लिए 700 मीट्रिक टन कोयला खपत का अनुमान लगाया था, लेकिन इंटरनेशनल मार्केट में कोयले की कीमत 40 फीसदी तक बढ़ी है। इंडोनेशिया में मार्च 2021 में कोयला की कीमत 60 डॉलर प्रति टन थी जो अब बढ़कर 200 डॉलर प्रति टन हो गई है। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में कोयले की कीमत भी तेजी से बढ़ी है। भारत बिजली उत्पादन के लिए 70 फीसदी कोयला ऑस्ट्रेलिया से इंपोर्ट करता है, लेकिन यहां दाम बढ़ने से कोयले का आयात घटा है। बिजली संकट के बीच ये जानना भी जरूरी है कि देश में बिजली उत्पादन का क्या हाल है और जो बिजली आपके और हमारे घरों को रौशन करती है उसे बनाता कौन हैं।

देश में जो बिजली बनती है, उसमें 25 फीसदी केंद्र सरकार के संस्थान बनाते हैं। 27 फीसदी राज्य सरकार के संस्थान बनाते हैं। 48 फीसदी प्राइवेट सेक्टर के संस्थान बनाते हैं। त्योहारों के सीजन और कोरोना संकट पर काबू पाने के कारण देश में औद्योगिक गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं, इसलिए बिजली की डिमांड भी बढ़ी है। 2019 में अगस्त-सितंबर महीने में बिजली की कुल खपत 10 हजार 660 करोड़ यूनिट प्रति महीना थी। 2021 में ये बढ़कर 12 हजार 420 करोड़ यूनिट प्रति महीने तक पहुंच गया है। इसको ऐसे में समझा जा सकता है कि 4 अक्टूबर 2021 को देश में बिजली की डिमांड 174 गीगावाट थी। 2 अक्टूबर 2020 को देश में बिजली की डिमांड 159 गीगावाट थी यानी इस साल बिजली की मांग बढ़ी है। इतना ही नहीं देश में बिजली के करीब 28 करोड़ उपभोक्ता बढ़े हैं। इससे बिजली की डिमांड बढ़ी है। ऐसे में बिजली उत्पादन घटने से संकट बढ़ सकता है।



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