बेस्ट की आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपइया

कमाई 450 करोड़, खर्च 1400 करोड़


मुंबई

बेस्ट प्रशासन ने यात्रियों को सुविधा देने के लिए निजी संस्थाओं से बस किराये पर लिया है। बेस्ट प्रशासन ने निजी संस्थाओं से बस किलोमीटर के हिसाब से लिया, जिसका भुगतान अब बेस्ट को करना पड़ रहा है। बेस्ट की कमाई 450 करोड़ रुपए हुई है,जबकि खर्च 1400 करोड़ रुपए हुआ है। 

इस तरह की जानकारी बेस्ट समिति सदस्य सुनील गणाचार्य दी। उन्होंने आरोप लगाया कि बेस्ट को इसी तरह चलाया गया तो अगले कुछ दिनों में बेस्ट निजी संस्थाओं के हाथों में दिखाई देगी। सुनील गणाचार्य ने बताया कि बेस्ट को निजी बसों से मात्र 450 करोड़ रुपए की कमाई हुई है, जबकि बेस्ट प्रशासन को इन बसों को कुल चले किलोमीटर के अनुसार एक हजार करोड़ रुपए देना पड़ा है। निजी बसों को अन्य प्रकार की सुविधा देने जिसमें वास कंडक्टर उपलब्ध कराना आदि का खर्च जोड़कर कुल 1400 करोड़ रुपए खर्च पहुंच गया है। इसी से अंदाज लगाया जा सकता है कि बेस्ट कितनी जल्दी घाटे के गढ्ढे में जाएगी। बेस्ट प्रशासन ने 3300 बस बेस्ट की खुद की रहेगी ऐसा मनपा आयुक्त ने खुद लिखकर दिया है इसके बावजूद बेस्ट बेड़े में मात्र अब 1900 बस ही शेष रह गई है।

बेस्ट को केंद्र ने दीं इलेक्ट्रिक बसें 

बेस्ट प्रशासन को केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक की बसें मुहैया कराई है। इन बसों की कीमत 50 लाख रुपए है। पर्यावरण को हो रहे नुकसान और डीजल एवं पेट्रोल पर होने वाले खर्च से बचने के लिए केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक की बसें मुफ्त में दीं हैं। बेस्ट इलेक्ट्रिक बसों का धूमधाम से उद्घाटन किया जा रहा है, लेकिन केंद्र सरकार से मुफ्त में मिली बसों में केंद्र का कहीं जिक्र तक नहीं किया जा रहा है।

निजी संस्थाओं की गाड़ियां चलाने का विरोध 

बेस्ट प्रशासन ने उनके ड्राइव्हर जिन्हें निजी संस्थाओं से बस लेने के बाद कोई काम नहीं  रह गया है, ऐसे ड्राइवहरों को निजी कंपनियों को भाड़े पर देने का निर्णय लिया है। बेस्ट के इस निर्णय को लेकर बेस्ट कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है। बेस्ट ड्राईवरों को पहले ही लोगों के घर-घर जाकर बिजली का बिल देने का काम सौंपा गया है। बेस्ट कर्मचारियों को इस तरह काम पर लगाए जाने का कर्मचारियों ने नाराजगी जताते हुए आंदोलन करने की चेतावनी दी है।


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