एक नवंबर से खुलेगा रानी बाग

मुंबई

कोरोना कोरोना के कारण मार्च 2020 से बंद चल रहे भायखला स्थित  वीरमाता जिजाबाई भोसले उद्यान व प्राणी संग्रहालय (रानी बाग) आखिरकार एक नवंबर से आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।  कोरोना नियमों का पालन करते हुए प्रशासन ने रानीबाग को खोलने की पूरी रुपरेखा तैयार कर ली है। उद्यान में मास्क के बिना प्रवेश नहीं दिया जाएगा। उद्यान निदेशक डॉ. संजय त्रिपाठी ने बताया कि यदि भीड़ अधिक होती है तो उद्यान का गेट बंद कर दिया जाएगा। गौरतलब हो कि मुंबई में पिछले वर्ष मार्च से कोरोना संक्रमण बढ़ने के बाद पूरे देश में लॉकडाउन लगा दिया गया था। इससे रानीबाग भी पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया था। हालांकि 15 फरवरी से इसे फिर से खोल दिया गया था, लेकिन 4 अप्रैल से फिर बंद करना पड़ा। अब प्रतिबंधों में पूरी तरह ढ़ील दे दी गई है। स्कूल, कार्यालय, थियेटर सब खुल गए हैं, लेकिन रानीबाग कब खुलेगा पर्यटक इसकी प्रतीक्षा कर रहे थे। सावधानी बरतते हुए एक नवंबर से खोलने का निर्णय लिया गया है। 

हर महीने 45 लाख का नुकसान

पिछले कुछ सालों से यहां जानवरों और पेंग्विन की संख्या बढ़ी है. बंद से पूर्व रोजाना 5-6 हजार पर्यटक आते थे. छुट्टी के दिन यह संख्या बढ़ कर 15 हजार तक हो जाती है. बंद होने के कारण महीने का 45 लाख का नुकसान उठाना पड़ रहा है. 

इस तरह है तैयारी

उद्यान परिसर और खुली जगह को देखते हुए रोज 10 हजार पर्यटक आते हैं तो चरणबद्ध तरीके से प्रवेश दिया जाएगा. भीड़ पर नियंत्रण और पर्यटकों का मार्गदर्शन करने के लिए 40 सुरक्षा रक्षकों की टीम तैनात की गई है. जगह-जगह सेनिटाइजर की व्यवस्था की गई है. प्राणियों के निवास के बाहर कांच से घेरा गया है. बिन मास्क प्रवेश नहीं दिया जाएगा. वैक्सीन की दो खुराक लेने वालों को प्राथमिकता दी जाएगी. भीड़ होने पर गेट को बंद कर दिया जाएगा.

प्रतिबंधों में पूरी तरह ढ़ील दे दी गई है। स्कूल, कार्यालय, थियेटर सब खुल गए हैं, लेकिन रानीबाग कब खुलेगा पर्यटक इसकी प्रतीक्षा कर रहे थे। फिलहाल तीसरी लहर की अभी कोई संभावना नहीं है, फिर भी रोजाना 400-500मरीज मिल रहे हैं। जानवरों और पक्षियों में कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए सावधानी बरतते हुए एक नवंबर से खोलने का निर्णय लिया गया है। 

हर दिन हो रहा डेढ़ लाख का नुकसान

रानीबाग में पिछले कुछ वर्षों में जानवरों और पेंग्विन की संख्या बढ़ी है। रोजाना 5-6 हजार पर्यटक आते हैं। छुट्टी के दिन यह संख्या बढ़ कर 15 हजार तक हो जाती है। लेकिन लंबे समय से बंद होने के कारण रोज डेढ़ लाख, महीने का 45 लाख रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। 


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