पीड़िता को चरित्रहीन बता रेप के आरोप से नहीं छूट सकता आरोपी

 


नई दिल्ली

रेप के एक मामले की सुनवाई करते हुए केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा है कि किसी रेप के आरोपी को यह कहकर नहीं छोड़ा जा सकता कि पीड़िता सेक्स की आदी थी या फिर उसका चरित्र सही नहीं था। एक पिता द्वारा अपनी बेटी का रेप के मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि केरल होईकोर्ट ने यह टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि एक पिता अगर बेटी का रेप करता है तो इससे जघन्य अपराध कुछ और नहीं हो सकता। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात का जिक्र किया कि जब एक पिता अपनी बेटी का बलात्कार करता है, तब यह एक रक्षक के भक्षक बनने से भी बदतर हो जाता है। न्यायमूर्ति आर नारायण पिशारदी ने यह टिप्पणी पीड़िता के पिता के यह दावा करने के बाद की कि उसे इस मामले में फंसाया जा रहा है क्योंकि उसकी बेटी ने स्वीकार किया है कि उसका किसी अन्य व्यक्ति के साथ यौन संबंध था। हाईकोर्ट ने पिता के बेगुनाही के दावों को खारिज करते हुए कहा कि यौन उत्पीड़न के परिणामस्वरूप मई 2013 में जन्में बच्चे की डीएनए जांच से यह खुलासा होता है कि पीड़िता के पिता बच्चे के जैविक पिता हैं। होईकोर्ट ने कहा कि यहां तक कि एक ऐसे मामले में जहां यह प्रदर्शित होता है कि लड़की यौन संबंध बनाने की आदी है, यह आरोपी को बलात्कार के आरोप से दोषमुक्त करने का आधार नहीं हो सकता। यदि यह मान लिया जाए कि पीड़िता ने पूर्व में यौन संबंध बनाया था तो भी यह कोई निर्णायक सवाल नहीं है। कोर्ट ने कहा िक इसके उलट इस बारे में निर्णय करने की जरूरत है कि क्या आरोपी ने पीड़िता का उस समय बलात्कार किया था, जिस समय के बारे में उसने शिकायत की है। 


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