बजट से विधानसभा क्षेत्र का विकास

सभापति निंबालकर, सीएम ठाकरे, उप सभापति नीलम गोर्हे और विपक्ष नेता फड़नवीस ने किया संबोधित


मुंबई 

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि बजट एक ऐसा रंग है जो विधानसभा क्षेत्र को विकसित कर सुंदर बनाने का काम करता है। जनप्रतिनिधियों से मेरा आव्हान है कि वे सतर्क रहें और अपने-अपने क्षेत्र के नागरिकों को बजट योजनाओं और विकास कार्यों का अधिक से अधिक लाभ सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई करें। महाराष्ट्र विधान में मंगलवार से दो दिवसीय आयोजित विधिमंडल सदस्यों की कार्यशाला का उद्घाटन करने के बाद कार्यक्रम के संबोधन में वे बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि सोमवार से राज्य में स्कूल शुरू हो गए हैं और हमने आज यहां हमारी कक्षा शुरू कर दी है। इस कार्यशाला में हम छात्र हैं। विधान परिषद का विधायक होने के कारण मुझे पूरे राज्य को अपना निर्वाचन क्षेत्र मानना है। यह कहते हुए कि विधानसभा सत्र पर आम जनता का ध्यान बजट मामलों के अनुसार लागू करने की जरूरत है और बजट को समझने और संबोधित करने की जरूरत है, मुख्यमंत्री ने दर्शकों को अवगत कराया कि राज्य की आम जनता विधानसभा सत्र के कामकाज को देखती है, कि उनके द्वारा चुने गए प्रतिनिधि सदन में हमारे हित से जुड़े मुद्दों को उठाते हैं या नहीं। इसलिए, एक महान परंपरा वाले इस हॉल में बोलने का अवसर मिलने पर, सभी को इस बात का ध्यान रखना होगा कि इस उच्च परंपरा को कैसे संरक्षित किया जाए। मुंबई में 'राज्य बजट' के विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया है। कार्यशाला में विधान परिषद के सभापति रामराजे नाइक-निंबालकर, उप सभापति  डॉ. नीलम गोरहे, संसदीय कार्य मंत्री अनिल परब, गृह मंत्री दिलीप वलसे-पाटिल, उद्योग मंत्री सुभाष देसाई, वित्त राज्य मंत्री शंभूराज देसाई ने हिस्सा लिया। संसदीय कार्य राज्य मंत्री सतेज उर्फ बंटी पाटिल, विधान सभा के सदस्य और विधान परिषद के दोनों सदनों के सदस्य वी.एस. हेमंत टकले, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष  अरुण गुजराती, पूर्व विधानसभा के मुख सचिव राजेंद्र भागवत, पार्लियामेंट्री ट्रेनिंग सेंटर के निदेशक नीलेश मदान सहित अधिकारी व कर्मचारी मौजूद थे। 

घर और राज्य के बजट में कोई अंतर नहीं ः फड़नवीस 

महाराष्ट्र विधिमंडल में राज्य के बजट के संदर्भ में दो दिवसीय आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्रतिपक्ष नेता देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि बजट को समझना बहुत आसान है। उन्होंने कहा कि घर की तरह राज्य का भी बजट होता है। घरमें पैसे आने के बाद उसे कब और किस काम के लिए खर्च करना है उसी तरह राज्य का भी बजट होता है। रकम आने के बाद राज्य में किस योजना के लिए कितनी रकम आवश्यक है यह सरकार तय करती है। मान लीजिए घर का बजट कम या ज्यादा है तो हम कर्ज लेते हैं और फिर चुका देते हैं। जैसा कि राज्य के मामले में होता है, राज्य को विभिन्न स्रोतों से धन प्राप्त होता है। 

यह तय होता है कि कहां खर्च करना है और अगर यह कम हो जाए तो हम कर्ज लेते हैं। बस इसे बहुत सारी अलग-अलग शब्दावली दें और फिर यह एक बजट बन जाता है। नहीं तो घर के बजट और राज्य के बजट में कोई अंतर नहीं है।

मुद्दों को समय पर पेश करने की कला सीखें विधायकः सभापति 

कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए विधान परिषद के सभापति रामराजे नाइक-निंबालकर ने कहा कि बजट सरल भाषा में पेश किया जाना चाहिए। इसके लिए अनुभवी विधायकों की समिति बनाकर बजट को सरल भाषा में कैसे पेश किया जाए, यह प्रस्ताव विधिमंडल में विचाराधीन हैं। आज आधुनिक तकनीक ने मीडिया को जन्म दिया है। लोगों में जागरुकता है। मतदाता और विरोधी दोनों देख रहे हैं कि हमारे सांसद विधायिका में क्या कहते हैं। जिसे मीडिया के माध्यम से तत्काल जानकारी मिल जाती है। इसलिए जरूरी है कि क्षेत्र में विकास कार्यों की योजना बनाई जाए। सत्र के दौरान विधानसभा में, विधान परिषद में कैसे बोलना है, प्रश्न और उत्तर कैसे प्रस्तुत करना चाहिए, इसका अध्ययन करना चाहिए। विधिमंडल के काम के साथ मुद्दे के महत्व को जोड़कर अपने निर्वाचन क्षेत्र में मुद्दों को प्रस्तुत करने की कला में महारत हासिल करनी चाहिए। इस दौरान उपसभापति नीलम गोरहे, राज्य के संसदीय कार्य मंत्री अनिल परब ने कार्यशाला को संबोधित किया।


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