एअर इंडिया का नया ‘पायलट’ बना टाटा

रतन टाटा ने कहा ‘वेलकम बैक’, 18000 करोड़ रुपए में फाइनल हुई डील


नई दिल्ली

एअर इंडिया की घर वापसी हो गई है। उसे टाटा ग्रुप 18,000 करोड़ रुपए में खरीद रहा है। इसका ऐलान फाइनेंस मिनिस्ट्री के डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (दीपम) ने किया। टाटा के हाथ एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस की कमान आएगी। दीपम के सेक्रेटरी तुहीन कांत पांडे ने कहा कि जब एयर इंडिया विनिंग बिडर के हाथ में चली जाएगी तब उसकी बैलेंसशीट पर मौजूद 46,262 करोड़ रुपए का कर्ज सरकारी कंपनी AIAHL के पास जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार को इस डील में 2,700 करोड़ रुपए का कैश मिलेगा।

‘नए सिरे से खड़ा करने में मेहनत लगेगी’

टाटा संस के मानद चेयरमैन रतन टाटा ने अपने ट्वीट में एयर इंडिया की बिड में टाटा ग्रुप के विनर बनने को बड़ी खबर बताया। उन्होंने कहा कि एयर इंडिया को नए सिरे से खड़ा करने में बहुत मेहनत लगेगी, लेकिन इससे एविएशन इंडस्ट्री में टाटा ग्रुप को बड़े कारोबारी मौके भी मिलेंगे। रतन टाटा ने कुछ उद्योगों को प्राइवेट सेक्टर के लिए खोलने की नीति के लिए सरकार की सराहना की।

स्पाइसजेट के चेयरमैन अजय सिंह ने दी बधाई

एअर इंडिया के लिए दूसरी सबसे ऊंची बोली लगाने वाले कंसॉर्टियम के लीडर और स्पाइसजेट के चेयरमैन अजय सिंह ने डील के लिए टाटा ग्रुप और सरकार, दोनों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि एयर इंडिया की बिडिंग के लिए शॉर्टलिस्ट होना उनके लिए गौरव वाली बात थी। उन्होंने विश्वास जताया कि टाटा ग्रुप कंपनी का मान-सम्मान वापस लाना कामयाब रहेगा और भारत को गौरवान्वित करेगा।

किसी भी नॉन एसेट को नहीं बेचा जाएगा

डील में एअर इंडिया की जमीन और इमारतों सहित किसी भी नॉन एसेट को नहीं बेचा जाएगा। कुल कीमत 14,718 करोड़ रुपए के ये एसेट सरकारी कंपनी AIAHL के हवाले कर दी जाएगी। 

कर्मचारियों को रखना होगा एक साल तक

एअर इंडिया के लिए पांच बिडर्स के टेंडर को खारिज कर दिया गया था। वे सरकार की तमाम शर्तों पर खरे नहीं उतर पाए थे। डील के तहत नए बिडर को एक साल तक के लिए एअर इंडिया के कर्मचारियों को भी रखना होगा। उसके बाद बिडर चाहे तो दूसरे साल से उन्हें वीआरएस दे सकता है। सरकार नए बिडर यानी टाटा को पूरी एयरलाइंस की जिम्मेदारी 4 महीने में देगी। शुक्रवार से 15 दिन बाद इसका ट्रांसफर का प्रोसेस शुरू होगा।

12,906 करोड़ रुपए थी रिजर्व प्राइस

एअर इंडिया का रिजर्व प्राइस 12,906 करोड़ रुपए था। एअर इंडिया की कीमत उसके एंटरप्राइज वैल्यू पर तय की गई थी। एंटरप्राइज वैल्यू मतलब कंपनी की वैल्यूएशन। एअर इंडिया शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है, इसलिए उसकी इक्विटी की कोई वैल्यूएशन नहीं की गई। हो सकता है कि टाटा आगे चलकर इसे शेयर बाजार में लिस्टेड करा दे। टाटा ग्रुप की 28 कंपनियां लिस्टेड हैं।

टाटा को लेना होगा कर्ज भी अपने ऊपर

बोली जीतने वाले टाटा ग्रुप को 15,300 करोड़ रुपए का कर्ज भी लेना होगा। एअर इंडिया पर कुल 43 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है। इसमें से 20 हजार करोड़ रुपए का कर्ज पिछले दो सालों में बढ़ा है। हालांकि यह कर्ज सरकार खुद अपने ऊपर लेगी और बोली जीतने वाले यानी टाटा के ऊपर 23 हजार करोड़ रुपए का कर्ज ही जाएगा।

टाटा समूह का एअर इंडिया के लिए बोली जीतना अच्छी खबर है। हम यह स्वीकार करते हैं कि एअर इंडिया को फिर से खड़ा करने के लिए हमें बहुत मेहनत करनी होगी, लेकिन इसी के साथ-साथ विमानन क्षेत्र में टाटा समूह की मौजूदगी उसे बाजार में आगे बढ़ने का मजबूत अवसर देगी।  उन्होंने निजी क्षेत्र के लिए सरकार की हालिया नीतियों को धन्यवाद कहा।


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