हिंदुत्‍व को जोर से बोलने की जरूरत


नई दिल्ली

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि हमारी पूजा विधि अलग- अलग है लेकिन पूर्वज एक हैं। उन्होंने कहा कि बंटवारे के बाद पाकिस्तान जाने वालों को वहां प्रतिष्ठा नहीं मिली। हिंदुत्व एक ही है जो सनातन है। उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि अब 75 साल बाद हिंदुत्व को जोर से बोलने की जरूरत है। सावरकर ने कहा था कि किसी का तुष्टिकरण नहीं होना चाहिए।

मोहन भागवत ने कहा विचार मानवता का ही है। मानवता के विचार को ही भारतीय परंपरा की भाषा में धर्म कहा जाता है। पूजा अलग-अलग हैं। भारतीय भाषा की परंपरा के अर्थ में धर्म का अर्थ वह नहीं है। जोड़ने वाला, ऊपर उठाने वाला, बिखरने ना देने वाला, यह लोक और परलोक में सुख देने वाला, प्रथम, मध्य और अंत तीनों जगह आनंदमय और प्रत्येक के स्वभाव को ध्यान में रखते हुए उसके कर्तव्य का निर्धारणकरण देने वाला शाश्वत तत्व धर्म है।

आजादी के बाद से ही चली मुहिम

उदय माहूरकर की लिखी पुस्तक वीर सावरकर: द मैन हू कैन्ड हैव प्रिवेंटेड पार्टिशन के विमोचन के मौके पर मोहन भागवत ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से ही वीर सावरकर को बदनाम करने की मुहिम चली है। अब इसके बाद स्वामी विवेकानंद, स्वामी दयानंद सरस्वती और योगी अरविंद को बदनाम करने का नंबर लगेगा, क्योंकि सावरकर इन तीनों के विचारों से प्रभावित थे।


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