सही और सामयिक पहल

ऐसे माहौल में जब देश विरोधी ताकतें कश्मीर में रहने वाले देश के अन्य राज्यों के लोगों को निशाना बना कर एक बार फिर वहां दहशत का माहौल बनाना चाहती हैं देश के गृहमंत्री की तीन दिवसीय जम्मू-कश्मीर यात्रा काफी महत्वपूर्ण है. यह यात्रा इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण है कारण यह गृहमंत्री की अनुच्छेद धारा 370 और धारा 35 ए हटाये जाने के बाद उक्त राज्य की पहली यात्रा है. देश और उसका निजाम इस बात से पूरी तरह वाकिफ है कि सीमा पार बैठे हुए आतंकिस्तान के आतंक कारोबारी घाटी में सामान्य होते हालात से काफी बेचैन हैं. दहशत का, अलगाववाद का, नफरत का जो खेल खेलने का उनका मंसूबा था और जिसके चलते वे दशकों से घाटी को लहू-लुहान किये हुए थे मोदी युग की आक्रामक रीति-नीति ने उसे धराशाई कर दिया है. आज धरती की जन्नत में नई सुबह का आगाज हो चुका है, जो उनसे नहीं पच रहा है। इसलिए वे अपने कुत्सित हथकंडों और घाटी में उनके बचे खुचे अराजक अवशेषों के मार्फत फिर माहौल को खराब करने का, दहशत का राज कायम करने का, नापाक कुचक्र रच रहे हैं. कुछ शर्मनाक और कायराना हमले भी उनके द्वारा किये गए हैं, जिसका करारा जबाब हमारे सुरक्षाबल और जम्‍मू-कश्‍मीर के पुलिस बल दे रहे हैं. गृहमंत्री ने अब तक के अपने दौरे में ऐसी अन्दर और बाहर की नापाक ताकतों को साफ, सही और असंदिग्ध संदेश दिया है कि भारत अब ऐसी कोई हरकत नहीं बर्दाश्त करेगा और बात अंदर की हो या बाहर की हर गलत हरकत का माकूल जबाब देने में हम सक्षम है. जिस तरह वहां सुरक्षा बल आतंकियों के पीछे पड़े हैं और उन्हें चुन-चुन कर जहन्नुम रसीद कर रहे हैं, यह उस बात की बानगी है. 

शाह ने अब तक के अपने दौरे जिसका आज आखिरी दिन है के दौरान युवाओं से, प्रशासन से, राज्य की रियाया से सबसे संवाद किया है और राज्य को सही अर्थों में जन्नत बनाने के प्रारूप को उनके सामने रखा ही नहीं, बल्कि उस पर काम हो रहा है यह भी दर्शाया है. साथ ही अपने परिवार का भला ही राज्य का भला मानने वाले वहां के परिवारवादी भ्रष्ट नेताओं को भी चेताया है कि राज्य कुछ परिवार की दादागिरी का अखाड़ा नहीं बन सकता, राज्य कुछ परिवारों के लिए नहीं है, बल्कि वहां की रियाया के कल्याण के लिए है. 

वैसे भी फारूक अब्दुल्ला शुरू में कुछ भी बोलने के बाद अब ऐसे बोल बोलने लगे हैं कि लगता है कि वे अनुच्छेद 370 और धारा 35 ए हटने के शॉक से उबर चुके हैं, लगता है उन्हें इस बात का एहसास हो गया कि जम्मू-कश्मीर उनकी जागीर नहीं है यह एक शुभ संकेत है. परंतु  महबूबा मुफ्ती अभी तक होश में आई नहीं लगती है. अभी भी वह जम्‍मू-कश्‍मीर में हो रहे बदलावों से भौंचक्की  लगती है और कुछ भी बोल रही हैं. ऐसा व्यवहार कर रही है कि जैसे उनके हाथ से सब कुछ चला गया है. एक प्रजातांत्रिक दल के नेता का ऐसा व्यवहार जो देश विरोध की हद तक जाता प्रतीत हो किसी भी तरह से सही नहीं है. उन्हें कम से कम अब जबकि गृहमंत्री ने जम्मू-कश्मीर के विकास का, कब राज्य का दर्जा दिया जाएगा का पूरा खाका देश और जम्मू-कश्मीर की जनता के सामने रख दिया है, तो कम से कम इस बदलाव को आत्मसात करना चाहिए. हमारी सरकार के इरादे क्या हैं, वह जम्मू-कश्मीर को कैसा बनाना चाहती है और आतंकी कारगुजारियों से, राज्य के अन्दर और बाहर के कुचक्रों से किस सख्ती से निपटेगी यह केंद्र के गृहमंत्री ने एकदम साफ कर दिया है. अब जरूरत है तो उन तथाकथित जागीरदारों को सही दृष्‍टि आने की जिन्हें अभी भी अतीत के अपने सुनहरे दिन ज्‍ााने के दौरे पड़ रहे हैं और कुछ भी अनाप-शनाप बोल रहे हैं. आवश्‍यकता है उनके सही राह पर चलने की नहीं तो वे खुद किनारे हो जायेंगे. कारण अब जम्‍मू-कश्मीर आगे चल पड़ा है, सही अर्थों में धरती की जन्नत बनने और जो इसमें रोड़ा बनेगा वह खुद 

किनारे हो जाएगा. यह परिवारवादी राजनीति करने वालों को समझना होगा. 

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