रुलाने लगा प्याज, टमाटर हुआ लाल, अनाज की कीमतों में भी उबाल


मुंबई

मॉनसून की वजह से बर्बाद हुई फसलें और डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से महंगाई की मार मुंबईकरों पर भी पड़ने लगी है। हर परिवार में रोज इस्तेमाल होने वाली सब्जियों की कीमतें सातवें आसमान पर दिखाई दे रही हैं, जिससे गृहणियों का बजट गड़बड़ा गया है। महंगाई की इस कोढ़ में घरेलू गैस की बढ़ी कीमतों ने खाज का काम किया है। खुदरा बाजारों में प्याज जहां 50 से 60 रुपए तक पहुंचकर गरीबों के आंसू निकाल रहा है तो टमाटर भी लाल होकर 60 से 70 रुपए तक पहुंच गया है। महंगाई की इस दौड़ में आलू ने भी रफ्तार बढ़ा दी है, जिससे उसका मीटर भी 30 से 35 रुपए तक हो गया है। फूल गोभी और पत्ता गोभी भी 80 रुपए के पार हो गए हैं। इसी तरह से सभी सब्जियों की कीमतों में 25 से 30 रुपए प्रति किलो का उछाल आया है। इसका असर अनाजों पर भी पड़ा है खाकर दलहनों पर. लोग सब्जियों के विकल्प के तौर पर जब दालों को तरजीह देते हैं तो मांग बढ़ने से कीमत बढ़ती है, लेकिन जानकारों का कहना है कि डीजल की कीमतें बढ़ने से ट्रांसपोर्टरों ने भाड़ा बढ़ा दिया है, जिसका असर अनाज की कीमतों पर पड़ा है।

गौरतलब हो कि मानसून ने जाते जाते जो बरसात की उसका सबसे ज्यादा असर प्याज की कीमतों पर पड़ा है। अन्य राज्यों में महाराष्ट्र के पुराने प्याज की मांग तेजी से बढ़ रही है। इससे बाजार में प्याज का भाव भी तेजी से बढ़ रहा है। प्याज व्यापारियों के मुताबिक नए प्याज को तैयार होने में अभी थोड़ा वक्त लगेगा। इसलिए प्याज का भाव अभी और बढ़ेगा। नए प्याज की फसल नवंबर में तैयार होकर सामने आएगी। ऐसे में दिवाली तक प्याज का भाव इसी तरह बढ़ता रहेगा। महाराष्ट्र और कर्नाटक में प्याज अधिक मात्रा में होता है। नवी मुंबई के एपीएमसी मार्केट में 100 से 130 गाड़ियों में प्याज मंगवाए जाते हैं। 

बजट संभालना मुश्किल

पिछले दो हप्ते से सब्जियों की कीमत बढ़ रही है। जहां प्रतिदिन 100-150 रुपए में काम हो जाता था, वहीं अब 200-250 रुपए खर्च करना पड़ रहा है। ऐसे में बजट संभालना मुश्किल हो रहा है।

-पुष्पा मिश्र, गृहिणी-मालाड

मजबूरी है क्या करें

सब्जियां रोज लगती है, चाहकर भी इसे बंद नहीं कर सकते क्या करें मजबूरी है। तुअर और मटर की दाल भी 5 से 8 रुपए तक महंगी हो गई है।

-सीमा सिंह, गृहिणी-कांदिवली               

हर तरफ तो महंगाई है

सब्जियों, दालों के साथ गैस भी तो महंगी है। किस तरफ कितनी कटौती करें समझ में नहीं आता। बड़े लोगों को शायद कम असर पड़ता हो, लेकिन मध्यम वर्ग को तो बहुत फर्क पड़ता है।

-कविता साहनी, कामकाजी महिला


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