लखीमपुर हिंसा मामला सुप्रीम कोर्ट ने फिर लगाई यूपी सरकार को फटकार


नई दिल्ली/लखनऊ

यूपी के लखीमपुर हिंसा मामले में दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। CJI एनवी रमन्ना ने एक बार फिर यूपी सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने पूछा कि गवाहों के मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराए? इस पर जवाब देते हुए यूपी सरकार के वकील हरीश साल्वे ने कहा कि 30 गवाहों के बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराए गए हैं, इनमें से 23 चश्मदीद गवाह हैं। कुछ बाकी हैं, जिनका बयान होना है। इसके बाद बेंच ने पूछा कि लखीमपुर में रैली के दौरान हजारों किसान मौजूद थे और आपको सिर्फ 23 चश्मदीद गवाह मिले? हरीश साल्वे ने कहा कि हमने सार्वजनिक विज्ञापन देकर यह मांगा है कि जो भी चश्मदीद हैं, वे सामने आएं। घटना में सभी मोबाइल वीडियो और वीडियोग्राफी पर भी ध्यान दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने गवाहों को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश देते हुए कहा कि उनके बयान तेजी से दर्ज किए जाएं। अब इस मामले की सुनवाई 8 नवंबर को होगी। केस की सुनवाई CJI एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच ने की। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि वहां चार-पांच हजार लोग थे, जो लोकल थे। साल्वे ने जवाब दिया कि सभी लोकल नहीं थे, कुछ बाहरी लोग भी थे। इस पर साल्वे ने कहा कि यहां सवाल चश्मदीदों का है। CJI ने कहा कि क्या आप जानते हैं कि इन मामलों में हमेशा एक संभावना होती है। CJI ने कहा कि आप अपनी जांच एजेंसी से कहें कि 23 लोगों के अलावा कितने लोग हैं, जिन्हें घटना देखी है। उनके बयान लें। इस पर साल्वे ने पूछा कि क्या हम आपको सीलबंद लिफाफे में गवाहों के कुछ दर्ज बयानों के बारे में दिखा सकते हैं? हम अदालत को अगली बार ब्यौरा देंगे। CJI ने कहा कि गवाहों की सुरक्षा का भी एक मुद्दा है। साल्वे ने कहा कि उनको सुरक्षा मुहैया कराई जा रही है। लखीमपुर खीरी में मृतक भाजपा नेता श्याम सुंदर की पत्नी ने SC से कहा कि मेरे पति को मार दिया गया है, मुझे न्याय चाहिए। हत्यारे खुलेआम घूम रहे हैं और मुझे धमकी दे रहे हैं। बेंच ने कश्यप और पत्रकार कश्यप की मौत पर यूपी से अलग जवाब मांगा है। इस दौरान बेंच से शिकायत की गई कि मृतक में से एक की पत्नी द्वारा उनकी शिकायत की जांच नहीं की गई है। इसी प्रकार घटना में मारे गए पत्रकार रमन कश्यप के मामले को भी उठाया गया है। 20 अक्टूबर को यूपी सरकार के वकील हरीश साल्वे ने जांच रिपोर्ट दाखिल की थी। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा था कि अगर आप आखिरी मिनट में रिपोर्ट देंगे तो हम कैसे पढ़ पाएंगे? 

कम से कम एक दिन पहले देनी चाहिए। अदालत ने यह भी पूछा कि इस मामले में UP सरकार ने बाकी गवाहों के बयान क्यों नहीं लिए? कोर्ट ने कहा कि आपने 44 में से अभी तक 4 गवाहों से ही पूछताछ की है, ऐसा क्यों? ऐसा लगता है कि यूपी पुलिस इस मामले की जांच से पीछे हट रही थी। इस छवि को सुधारिए। कोर्ट ने आगे कहा कि आपकी SIT यह समझ सकती है कि सबसे कमजोर गवाह कौन-से हैं और उन पर हमला हो सकता है, तो फिर अभी तक सिर्फ 4 गवाहों के ही बयान दर्ज क्यों किए गए'?


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