मराठी स्कूलों में कम हुए विद्यार्थी

दस साल में घटे 70 हजार बच्चे  |  मराठी माध्यम के 130 स्कूल हुए बंद


मुंबई

भाषा के नाम पर राजनीति करने वालों को वर्तमान वस्तुस्थिति पर जरूर मंथन करना चाहिए। मनपा द्वारा संचालित मराठी स्कूलों में घटती विद्यार्थियों की संख्या अभिभावकों की बदलती मानसिकता को तो दिखलाती ही है, साथ ही मनपा प्रशासन की गलत नीतियों की तरफ भी इशारा करती है। सरकारी कार्यालयों में सभी काम-काज मराठी में करना अनिवार्य किया गया है, इसके बावजूद मराठी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए अभिभावक दूर भाग रहे हैं। एक आंकड़े के अनुसार पिछले दस सालों में मनपा स्कूलों में मराठी माध्यम से पढ़ने वाले बच्चों की संख्या में 70 हजार की कमी आई है।

गौरतलब हो कि वैश्वीकरण के इस दौर में अभिभावक अपने बच्चों को अंग्रेजी के अलावा दूसरे बोर्ड की शिक्षा दिलाने में अधिक रूचि ले रहे हैं। बता दें कि मुंबई मनपा 413 मराठी स्कूलों में बच्चों को शिक्षा देने का काम कर रही है। पिछले दस साल में मराठी के 130 स्कूल बंद हुए हैं। दस साल पूर्व मराठी स्कूलों में एक लाख 35 हजार बच्चे पढ़ते थे जो अब घटकर मात्र 35 हजार 181 रह गए हैं। अंग्रेजी के प्रति बढ़ते लगाव को देखते हुए मनपा ने अंग्रेजी माध्यम के स्कूल शुरू किए हैं। इसके अलावा सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड की शिक्षा शुरू की है। इनमें प्रवेश के लिए एक क्लास में अधिकतम 50 बच्चों की संख्या तय होने के बावजूद हर क्लास के लिए 100 से अधिक बच्चे प्रवेश पाने के लिए आ रहे हैं, जिसके चलते मनपा को लॉटरी सिस्टम से प्रवेश देने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

जिम्मेदार कौन?

बंद हो रहे मराठी स्कूल और घट रही बच्चों की संख्या पर भाजपा ने मनपा की सत्ताधारी शिवसेना को जिम्मेदार ठहराया है। शिक्षण समिति में भाजपा सदस्य प्रतीक कर्पे ने कहा कि शिवसेना को मराठी भाषा की याद सिर्फ चुनाव के समय आती है। भाजपा विधायक आशीष शेलार ने कहा कि यही स्थिति रही तो वर्ष 2027 तक मराठी भाषा के सभी स्कूल बंद होते दिखाई देंगे।


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