दिल के मरीजों के लिए कारगर है हार्टबीट


एस्ट्राजेनेका इंडिया ने हेल्थ-टेकस्टार्टअप, ट्रिकॉग के साथ मिलकर 'प्रोजेक्ट हार्ट बीट' नामक एक कार्यक्रम शुरू किया, जो हार्ट अटैक के रोगियों के शुरुआती और सटीक निदान पर केंद्रित है, जिससे मृत्यु दर को कम किया जा सके। यह वर्तमान में टियर 1, 2 कस्बों और गांवों में चल रहा है, जहां गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा की पहुंच नहीं है। यह परियोजना क्लाउड-आधारित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समर्थित इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) की व्याख्या को सक्षम करके, रोगियों को निकटतम कैथ लैब या फाइब्रिनोलिसिस केंद्रों तक पहुंचाकर संदिग्ध दिल के दौरे के रोगियों के लिए शीघ्र निदान और हस्तक्षेप की आवश्यकता को पूरा करती है, जिससे सटीक निदान और समय पर उपचार सुनिश्चित होता है और अंततः रोगी के परिणाम में सुधार होता है।  इस पहल का उद्देश्य प्राथमिक और माध्यमिक देखभाल केंद्रों में चिकित्सकों और तकनीशियनों को बेहतर उपचार परिणामों के लिए अनुशंसित एसीएस (एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम) उपचार प्रोटोकॉल और तृतीयक देखभाल केंद्रों के लिए प्रारंभिक रेफरल का पालन करके दिल के दौरे के रोगियों का बेहतर प्रबंधन करने में मदद करना है। प्रोजेक्ट हार्ट बीट के सफल रोलआउट पर टिप्पणी करते हुए, गगन सिंह बेदी ने कहा, हार्ट अटैक और इसके उपचार के संबंध में, शीघ्र निदान और समय पर उपचार महत्वपूर्ण है। चूंकि युवा आबादी भी इन दिनों दिल के दौरे से ग्रस्त है, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि हम देश के ग्रामीण हिस्सों में शीघ्र निदान और उपचार के लिए सुविधाओं की व्यवस्था करें, क्योंकि उनके पास आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं तक आसान पहुंच नहीं है। इस कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्यों में एमआई रोगियों का शीघ्र और सटीक निदान, डोर टू बैलून टाइम / नीडल टाइम को कम करना और प्राथमिक देखभाल केंद्रों पर आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराना शामिल है। इस कार्यक्रम के माध्यम से, हम पहले ही 13,000 से अधिक रोगियों के जीवन को स्‍पर्श कर चुके हैं और इसके परिणामस्वरूप असामान्य ईसीजी की शीघ्र पहचान हुई है, जिन्हें प्रभावी रोग प्रबंधन में और सहायता के लिए उनके संबंधित टर्शियरी केयर अस्पतालों में भेजा गया था। इस अभियान के लिए, एस्ट्राजेनेका ने हब एंड स्पोक मॉडल का प्रयोग किया है, जिसमें इसने बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप ट्रिकॉग हेल्थ के साथ साझेदारी की है। वर्तमान में 39 प्राथमिक/द्वितीयक देखभाल केंद्रों (स्पोक) से जुड़े 8 तृतीयक देखभाल केंद्र (हब) हैं, जहां एक संचारक उपकरण के साथ 12-लीड ईसीजी मशीनें लगायी गयी हैं। डिवाइस वास्तविक समय में क्लाउड पर ईसीजी रीडिंग भेजता है, जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एल्गोरिदम डेटा की व्याख्या करता है, जिसकी समीक्षा प्रशिक्षित चिकित्सक द्वारा की जाती है और प्रतिक्रिया को प्राथमिक / माध्यमिक देखभाल केंद्र में वापस भेज दिया जाता है। साथ ही 10 मिनट से भी कम समय में इसे तृतीयक देखभाल केंद्र को भेज दिया जाता है। इस पहल पर टिप्पणी करते हुए  डॉ चरित बोगराज ने कहा, हम इस परियोजना के लिए एस्ट्राजेनेका के साथ साझेदारी करके खुश हैं क्योंकि यह कुछ ऐसा है जो कई भारतीयों के जीवन को प्रभावित करता है।

Post a Comment

[blogger]

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget