कामयाब रहे विक्की कौशल


स्वतंत्रता सेनानी सरदार उधम सिंह ओटीटी के अमेजन प्राइम पर रिलीज हो चुकी है। विक्की कौशल द्वारा अभिनीत इस फिल्म में जलियावालां बाग हत्याकांड से लेकर जनरल डायर की हत्या तक सरदार उधम सिंह के जीवन में घटे घटनाक्रम को खूबसूरती से दिखाया गया है। शूजीत सरकार ने एक वीर सेनानी की संघर्ष और जज्बे से भरी कहानी को दिखाने में कतई जल्दबाजी नहीं की है। फिल्म के छोटे-छोटे फ्लैशबैक, उधम सिंह के दिमाग में चल रही बदले की हद और भारत की आजादी का जज्बा, उन्हें बड़े ही तफ्सीली नजरिए से पेश किया है, जिसे एक हद तक सफल माना जा सकता है। इस फिल्म में देखा जाए तो अंग्रेजी राज भी दिखा है और विदेशी राज भी। 1900 से 1941 के दौर के भारत और लंदन का जीवंत जीवन दिखाने के लिए शूजीत सरकार को पूरे नंबर दे देने चाहिए, लेकिन केवल जीवन दिखाने से ही फिल्म पूरी नहीं मान ली जाती।  फिल्म का मुख्य हिस्सा उधम सिंह बने विक्की कौशल के हर सफर को तसल्ली बख्श तरीके से गढ़ता है। यूं भी शूजीत किसी किरदार को यूं ही पैदा करके फिल्म में नहीं डालते। वो किरदार के जन्म से लेकर उसके मैच्योर होने तक का वक्त दिखाते हैं और उसी वक्त की कहानी को खूबसूरत तरीके से कहने की कहानी अच्छी बन पड़ी है।

जलियावालां बाग से उधम सिंह का निजी कनेक्शन, अपनों का बदला लेने का जज्बा कब देश को आजाद कराने की जिद में बदल जाता है, फिल्म बताती है। कुछ विदेशियों की मदद और कुछ देशवालों की मदद से जब उधम सिंह पराए मुल्क में एक जनरल को जलसे में गोली मारता है तो वो भागने की बजाय वहीं रुककर पुलिसवालों के सामने खड़ा हो जाता है।


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