बीएसएनएल ने लगाई मोदी सरकार से गुहार


नई दिल्ली

सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल ने 40,000 करोड़ रुपए की वित्तीय मदद के लिए सरकार से संपर्क किया है। इसमें से आधी राशि अल्पकालिक कर्ज चुकाने के लिए सरकारी गारंटी के रूप में जरूरत है। बीएसएनएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक पीके पुरवार ने बताया कि कंपनी को किसी अतिरिक्त कर्ज की जरूरत नहीं है और परिचालन के लिए उसका कारोबार आत्मनिर्भर हो गया है। पुरवार ने कहा, 'हमें किसी अतिरिक्त ऋण की आवश्यकता नहीं है। हमने अपने अल्पकालिक ऋण का भुगतान करने और दीर्घकालिक बांड जारी करने के लिए 20,000 करोड़ रुपए की सरकारी गारंटी मांगी है। अगर हमें मोबाइल नेटवर्क के लिए एक लाख नोड बी (मोबाइल साइट्स) स्थापित करना है तो हमें 20,000 करोड़ रुपए की आवश्यकता होगी।' बीएसएनएल के सीएमडी ने पुष्टि की कि उन्होंने सहायता के लिए सरकार से संपर्क किया है, जो 2019 में घोषित 69,000 करोड़ रुपए के राहत पैकेज से अलग है।

फिलहाल बीएसएनएल पर 30,000 करोड़ रुपए का कर्ज है जो दूरसंचार क्षेत्र में सबसे कम है। पुरवार एमटीएनएल के भी प्रमुख हैं, जिसका बीएसएनएल में विलय करने का प्रस्ताव है। सरकार पहले ही बीएसएनएल को दिल्ली और मुंबई में मोबाइल व्यवसाय संचालित करने के लिए परमिट जारी कर चुकी है, जिसका प्रबंधन पहले एमटीएनएल द्वारा किया जाता था। मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने घाटे में चल रही दूरसंचार कंपनी एमटीएनएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक के रूप में पुरवार के अतिरिक्त प्रभार को एक वर्ष की अवधि के लिए अक्टूबर 2022 तक बढ़ा दिया।

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