एनसीबी की छापेमारी पर विवाद शुरू


मुंबई

नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की क्रूज़ पर की गई छापेमारी के बाद शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब मामले में पंच बनाए गए प्रभाकर साइल ने दावा किया है कि एनसीबी के अधिकारी सालेकर ने उसे एनसीबी दफ्तर में बुलाया और दस सादे कागजों पर उसका हस्ताक्षर लिया और उसे भरोसा दिलाया कि कुछ नहीं होगा। 

साइल ने दावा किया है कि वह रेड के दौरान क्रूज के बाहर टर्मिनल पर मौजूद था, लेकिन रेड के दौरान क्रूज पर नहीं था. जब्ती उसके सामने नहीं हुई थी। उसे रेड के बाद कुछ लोगों की तस्वीर भेजकर उन्हें पहचानने को कहा गया था। छापेमारी के समय वह मामले के एक और पंच किरण गोसावी के निजी बॉडीगार्ड के तौर पर काम करता था। गोसावी ने ही उसे फोन कर एनसीबी ऑफिस आने को कहा था। 

साइल ने जताई अगवा होने की आशंका

हलफनामे में प्रभाकर ने आशंका जताई है कि नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के अधिकारी उसे अगवा या उसकी हत्या कर सकते हैं। 

बता दें कि खुद को प्रायवेट डिटेक्टिव बताने वाला गोसावी पहले ही धोखाधड़ी के आरोपों से घिरा है और वह फरार है। गिरफ्तारी के बाद आर्यन खान के साथ एनसीबी ऑफिस में ली गई उसकी सेल्फी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। वह आर्यन को पकड़कर एनसीबी ऑफिस में भी ले जाता दिखा था। इसके बाद से ही एनसीबी की कार्रवाई सवालों के घेरे में है।

एनसीबी की सफाई

इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए एनसीबी के डिप्टी डायरेक्टर जनरल मुथा अशोक जैन ने बयान जारी किया और कहा कि सोशल मीडिया के जरिए हमें प्रभाकर साइल के हलफनामे की जानकारी मिली है। जिसमें प्रभाकर ने 2 अक्टूबर की अपनी गतिविधियों की जानकारी दी है। वे जिस मामले में गवाह हैं वह अदालत में विचाराधीन है इसलिए वहां हलफनामा देना चाहिए। 

जोनल डायरेक्टर समीर वानखेडे ने इसे पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। हलफनामा आगे की कार्रवाई के लिए नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के डायरेक्टर जनरल के पास भेजा जा रहा है।


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