मेडिकल इंडस्ट्री चिप शॉर्टेज से परेशान


नई दिल्‍ली

सेमीकंडक्टर क्राइसिस या ग्लोबल चिप शॉर्टेज का असर अब ऑटो और इलेक्ट्रॉनिक्स के अलावा मेडिकल सेक्टर पर भी दिखने लगा है। क्रिटिकल मेडिकल इक्विपमेंट्स में भी चिप का इस्तेमाल होता है। चिप की कमी और सप्लाई चेन की समस्याओं के कारण क्रिटिकल मेडिकल इक्विपमेंट्स का रेट बहुत तेजी से बढ़ने लगा है। इससे मेडिकल टेस्ट भी महंगे होंगे और आम जनता के लिए इलाज कराना और ज्यादा खर्चीला हो जाएगा। अगर मेडिकल इंडस्ट्री के लिए चिप की शॉर्टेज होगी, तो वेंटिलेटर, डेफिब्रिलिएटर, इमेजिंग मशीन, ग्लूकोस, ECG, ब्लड प्रेशर मॉनिटर, इंप्लांट पेसमेकर समेत दर्जनों मेडिकल इक्विपमेंट्स की क्राइसिस हो जाएगी। इन तमाम मेडिकल इक्विपमेंट्स के बिना किसी की जान को बचाना संभव नहीं है। ऐसे में इस बारे में गंभीरता से सोचना ही पड़ेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल के अंत तक मेडिकल इंडस्ट्री के लिए चिप शॉर्टेज की समस्या और ज्यादा विकराल हो जाएगी। इसके कारण इक्विपमेंट्स की कीमत 20 फीसदी तक बढ़ सकती है।

चीन, जापान, ताइवान से होता है आयात

भारत में मेडिकल इंडस्ट्री में चिप की सप्लाई डोमेस्टिक प्लेयर्स की तरफ से की जाती है। ये वेंडर विदेशों से आयात करते हैं और मेडिकल इक्विपमेंट्स बनाने वाली कंपनियों को चिप की सप्लाई करते हैं। मेडिकल में इस्तेमाल होने वाले ज्यादातर चिप का आयात चीन, जापान, ताइवान और अमेरिका से किया जाता है। कंपनियों का कहना है कि उनके लिए नए चिप सप्लायर की तलाश करना कठिन है। इसके अलावा यह बहुत ज्यादा टाइम टेकिंग भी है। दुनिया में चिप का मार्केट बहुत बड़ा है। हर मशीन, इक्विपमेंट्स में इसका इस्तेमाल होता है। हर सेक्टर में कहीं ना कही इसकी जरूरत होती है। डेलॉयट की रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में ग्लोबल सेमीकंडक्टर मार्केट करीब 452 बिलियन डॉलर का है। 2028 में यानी सात सालों बाद यह बढ़कर 803 बिलियन डॉलर का हो जाएगा। 2019 में मेडिकल चिप का मार्केट 5 बिलियन 

डॉलर का था, जो टोटल मार्केट का करीब एक फीसदी था।


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