सावधानी और सतर्कता अभी भी जरूरी

देश आजकल कोरोना से राहत महसूस कर रहा है. वैक्सीनेशन की बढ़ती रफ्तार और जन सावधानी से इसके प्रसार पर रोक लगती दिख रही है. व्यापारिक, शैक्षणिक प्रतिष्ठान खुल रहे हैं. मंदिर और पूजागृह भी खुल रहे हैं. पिछले डेढ़ साल से लम्बे समय तक इस महामारी के कहर ने हमारे लिए कितनी परेशानियां खड़ी की हैं, हमारे और देश की अर्थव्यवस्था को किस हद तक प्रभावित किया, लोगों ने दूर दराज इलाकों से अपने मूल स्थान पर पहुंचने के लिए किन-किन झंझटों का सामना किया यह सर्वविदित है. इस लड़ाई में कितने कोरोना योद्धाओं ने अपनी जान गवांई यह भी हम अच्छी तरह जानते हैं. इसके भुक्तभोगी भी काफी तादाद में अपनी जान गवां चुके हैं, जो इस पर विजय पाए वे भी बाद में कई तरह की स्वास्थ्यगत समस्याओं का सामना कर रहे हैं. तो जब आज राहत दिख रही है, तो इसका मतलब यह कदापि नहीं है कि महामारी हमारे बीच से जा चुकी है अभी भी वह है और संक्रमण का खतरा अभी भी बरकरार है और इसीलिए राहत दिखने के बाद हमारी सरकार ने आर्थिक क्रिया-कलाप शुरू करने की, आवागमन उपलब्ध कराने  की और जन-जीवन सामान्य करने के लिए रियायतें देना शुरू किया है. उन रियाताओं के साथ कुछ बंधन और शर्तें भी रखी हैं, जिससे जन-जीवन इस तरह संपादित हो कि फिर महामारी का प्रसार ना हो और फिर तालाबंदी जैसी बंदिशें लगाने की नौबत ना आये.

यह हमें नहीं भूलना है, अभी भी मास्क लगाने की, भीड़भाड़ ना करने की, समय-समय अपर हाथ धोने की संक्षेप में कोरोना उपयुक्त व्यवहार के सख्त अनुपालन की उतनी ही आवश्यकता है, जितनी कोरोना बीमारी के उषाकाल में थी. इसके साथ ही वैक्सीनेशन को पूरी गंभीरता से अपनाएं, जल्दी से जल्दी देश के हर व्यक्ति को इसका टीका लगे इसके लिए केंद्र सरकार प्रयत्न की पराकाष्ठा कर रही है और देश में बड़ी तेजी से टीकाकरण हो रहा है. हर अध्ययन यही बता रहे हैं कि कोरोना उपयुक्त व्यवहार  और टीकाकरण ही इससे बचने का सबसे मुफीद तरीका है, तो हम इन दोनों बिन्दुओं पर कोई लापरवाही ना करें कारण लापरवाही हमारे जान की आफत बन सकती है. अभी भी ऐसे लोग मिल जा रहे हैं जो कोरोना उपयुक्त व्यवहार का अनुपालन नहीं कर रहे हैं. जो सर्वथा अनुचित और अस्वीकरणीय है. यह अपराध है कारण हमारी लापरवाही एक साथ कई लोगों को संक्रमित कर सकती है. आज कल त्योहारों का समय है, ऐसे समय में भीड़भाड़ होना स्वाभाविक है. आम समय में ऐसा होना लाजमी था, परन्तु आज का समय महामारी का समय है ऐसे समय में हमारी जिम्‍मेदारी और बढ़ जाती है कि राहत आफत में तब्दील हो जाय और सरकार को फिर कड़ी बंदिशें लगाने के लिए बाध्य होना पड़े. तालाबंदी किसी के भी हित में नहीं है इसका एहसास हमें पिछले डेढ़ साल में अच्छी तरह हो चुका है. पूरी अर्थव्यवस्था चरमरा गयी है, ना जाने कितने लोग बेरोजगार हुए हैं, उद्यमी-कामगार सबकी कमर टूटी है. बड़ी मेहनत से महामारी से राहत मिलती  प्रतीत हो रही है, अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने कर्मों से कम से कम इसे कहर या अभिशाप में तब्दील ना करें. हम यह कर सकते हैं, लेकिन यह भी उतना ही सच है की जरा सी राहत पर लापरवाह भी हो जाते हैं तो कम से कम अब लापरवाही ना हो. हम पूरी सावधानी, सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ अपने दैनिक कार्यों का सम्पादन करें और वैक्सीनेशन को अपनाएं, जिससे महामारी की यह राहत स्थाई राहत में बदले और जन-जीवन सामान्य हो सके.


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