वर्किंग मदर के बच्चे होते हैं बेस्ट


ऑफिस जानेवाली मां हमेशा गिल्ट के साथ जीती है। बच्चों के युवा होने पर भी यह गिल्ट बना रहता है कि वो बच्चों पर पूरा ध्यान नहीं दे सकी। अब ऐसी सोच को किनारे करने का समय आ गया है। शोध बताते हैं कि कामकाजी मां के बच्चे, हाउसवाइफ मां के बच्चों की तुलना में ज्यादा कामयाब होते हैं। इनके बेटे-बेटियों में ढेरों खूबियां होती हैं।

ऑफिस जाने का अफसोस अब नहीं

यूएस के हार्वर्ड बिजनेस स्कूल की स्टडी के अनुसार होममेकर मां की तुलना में वर्किंग मॉम के बच्चे बड़े होकर खूब तरक्की करते हैं। बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की प्रो.कैथलीन मैकगिन ने पाया कि कामकाजी मां के बच्चे वर्कफ्रंट के साथ जिंदगी में भी खुश रहते हैं। हाउसवाइफ मां के बच्चों से तुलना करने पर ऑफिस जानेवाली मां के बच्चे ज्यादा पढ़े-लिखे पाए गए। इन मांओं के बेटे बड़े होकर फैमिली की अधिक केअर करते हैं। अपने लिए वर्किंग वाइफ तलाशते हैं। 29 देशों के 1 लाख महिलाओं और पुरुषों पर हुए इस सर्वे ने वर्किंग मदर को ‘गिल्ट फ्री’ महसूस करने का मौका दिया।

बेटियों के लिए तो और बढ़िया है

साल 2015 की स्टडी में पाया गया कि वर्किंग मां की बेटियां करिअर में भी कमाल करती हैं। इनकी तनख्वाह उन लड़िकयों से ज्यादा ( प्रति वर्ष 1880 डॉलर यानी 1 लाख 41 हजार रु.) पाई गई, जिनकी मां हाउसवाइफ थीं। कामकाजी मां की बेटियां ऑफिस वर्क को लेकर सीरियस देखी गईं। गृहणी मां की बेटियों की तुलना में वे वर्कप्लेस को अधिक समय (44 मिनट प्रति सप्ताह) देती हैं। इसके साथ ही ऑफिस में सुपरविजन से जुड़ी जिम्मेदारियों को अच्छे तरीके से निभाती हैं। एक और मजेदार बात इनके पक्ष में यह पायी गई कि वर्किंग मदर की लड़कियों को घरेलू मां की बेटियों की तुलना में नौकरी मिलने की संभावना 1.21 गुना अधिक होती है। प्रोफेसर मैकगिन इस बात पर जोर देती हैं कि बेटियों के लिए पेरेंट्स खासकर वर्किंग मां रोल मॉडल होती हैं। मल्टीटास्किंग मदर की जद्दोजहद देखकर उनको जिंदगी से जुड़ा हर पहलू आसान लगता है।

नया नजरिया समझना जरूरी

हिमाचल प्रदेश की शूलिनी यूनिवर्सिटी में ‘इम्पलिमेंटेशन एंड स्कोप ऑफ मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट’ विषय पर हुए शोध में पाया गया कि बच्चों को लेकर मदर्स गिल्ट में कमी आई है। शोधकर्ता डॉ. अंकिता वर्मा के अनुसार, “वर्किंग मदर को पहले की तुलना में परिवार और समाज से अधिक सपोर्ट मिला है। छोटे शहरों में क्रेच की उपलब्धता ने भी बच्चों को लेकर चिंता को कम किया है, लेकिन अपने करिअर को लेकर गिल्ट बढ़ा है। वह करिअर में बहुत अच्छा प्रदर्शन करना चाहती हैं, लेकिन कंपनियों और सरकार की ओर से मिल रही सुविधाएं अब भी अपर्याप्त हैं। वर्किंग वुमन से जुड़े नियम बनाते वक्त सभी पक्ष की बराबर भागीदारी होनी चाहिए। सरकार,मालिक और महिला कर्मचारी साथ मिलकर महिलाओं के रोजगार से जुड़े कानून बनाएं । इसके अलावा मैटरनिटी लीव के साथ पैटरनिटी लीव भी दी जाए ताकि कंपनियों को वर्किंग वुमन बोझ नहीं लगे।”

एक्सपर्ट के टिप्स :

बच्चों को हमेशा प्राथमिकता दें। काम की लिस्ट बनाते समय बच्चों से जुड़े कामों को टॉप पर रखें। उनका स्कूल वर्क, हॉबी, फूड, मूड, तबियत सभी जरूरी चीजों को हाईलाइट करें। उनसे जुड़ा कोई काम अधूरा नहीं रहेगा और आप सुकून महसूस करेंगी।


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