सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की ओछी कोशिश

अनुच्छेद 370 और 35 ए हटाने के बाद जिस तरह से अब तक जम्मू-कश्मीर के प्रशासन का संचालन हो रहा है वह काबिले तारीफ है. हमारे कुशल प्रशासकों और सुरक्षा बलों ने चुन-चुन कर आतंकियों को जिस तरह जहन्नुम रसीद किया और उन्हें पलायन का रूख अख्तियार करने को बाध्य किया, वहां विकासात्मक और प्रजातांत्रिक क्रिया-कलाप शुरू किया, उससे आतंकी आकाओं और आतंकिस्तान दोनों में बेचैनी का आलम है और वह इस पर अमादा हैं कि किसी तरह वहां यानी घाटी का माहौल पुन: विषाक्त हो. जिस तरह चुन-चुन कर घाटी में हिन्दू और सिखों को निशाना बनाया जा रहा है यह इसी ओर इशारा कर रही है. राहत की बात यह है कि इस सच्चाई से देश का निजाम बखूबी वाकिफ है और इसलिए इस पर जल्दी लगाम लगेगी, इसमें कोई संदेह नहीं है. एक बार फिर केंद्रीय गृहमंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन सक्रिय हो गया है और इस पर अंकुश लगाने में ज्यादा देर नहीं है. संयोग से इस बार अब्दुल्ला और मुफ्ती परिवार के भी सही सुर निकल रहे हैं, इससे सीमा पार के विघ्‍न संतोषियों को सही संदेश जाएगा, नहीं तो ये दोनों अपनी राजनीतिक दुकान के खतरे में पड़ने के बाद से जिस तरह का सुर अलाप रहे थे वह सर्वथा अनुचित और निंदनीय था. जिस तरह स्कूल में घुसकर दो शिक्षकों की हत्या की गयी, नि:संदेह वह खौफनाक है. पिछले पांच दिनों में यहां सात लोगों की जान जा चुकी है कुल मिलाकर ऐसे जघन्य कृत्य सांप्रदायिक सद्भाव की बलि लेने के साथ दहशत का ऐसा माहौल पैदा करते हैं जिसने 90 के दशक में वहां के पंडितों को अपना घर बार छोड़ने को मजबूर किया था, अब जबकि उन्हें वहां दोबारा आबाद करने के प्रयास हो रहे है, ऐसी हैवानियत कुछ वैसा ही करने की सीमा पार के आतंकी आकाओं और भाड़े के हैवानों की मनसा को दर्शाता है. जिससे हमारा देश और जम्‍मू-कश्मीर का निजाम अनजान है ऐसा नहीं लगता, तो अब आवश्‍यक है ​िक इस दिशा में त्वरित और सख्त कार्रवाई हो. दहशत और असुरक्षा का जो माहौल जम्मू-कश्मीर में पुन: जीवित करने की नापाक कोशिश आतंकिस्तान और उसके द्वारा पालित-पोषित नराधमों द्वारा की जा रही है उस पर लगाम लगे और घाटी सहित राज्य में जो सबका साथ सबका विकास की बयार बह रही है और सही अर्थों में कश्मीरियत बहाल करने की जो कोशिश हो रही है वह जारी रह सके. जिस तरह पाक द्वारा ड्रोन से हथियार भेजने की कोशिश हो रही है, जिस तरह समय-समय पर आतंकी मारे जा रहे हैं, हथियार बरामद हो रहे हैं और जिस तरह अब ऐसी दर्दनाक और वहशी कुकृत्य  अंजाम दिये जा रहे हैं. स्पष्ट है कि अभी भी पाक ने अपना आतंक का निर्यात करना बंद नहीं किया है. तमाम झटके खाने के बाद भी उसकी काली कारस्तानियां नहीं रुक रही हैं, उसकी घुसपैठ की कोशिशें उसके द्वारा घाटी में हैवानों को माल असलहा आपूर्ति करने के प्रयास बदस्तूर जारी हैं, तो सब कुछ करते हुए उसे भी निर्णायक झटका देना भी जरूरी हो सकता है. इस दृष्टि से भी हमारे निजाम को विचार करना पड़ सकता है. विश्वास है की हमारे सुरक्षा बल, हमारे देश की और जम्मू-कश्मीर की सरकार जल्द से जल्‍द वह सब कुछ करेगी, जिससे निर्दोषों को निशाना बनाकर वहां जो दहशत और असुरक्षा का माहौल पुन: जीवित करने का कुत्सित खेल खेलने की कोशिश आतंकिस्‍तान और उसके भाड़े के हैवानों द्वारा की जा रही है अपनी मौत मरेंगे और इस बार उनका स्थायी इलाज होगा. कारण ऐसी कार्रवाईयां उनकी हताशा का परिचायक हैं. इसका मतलब बाजी उनके हाथ से जा चुकी है कुछ भी कर वे अपने को जिंदा करना कहते हैं. हमें उन्हें जिंदा नहीं होने देना है, भले फिर एक बार क्यों ना सीमा पार करनी पड़े इन पर रोक जरूरी है. 


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